घाघरा नदी बरबादी के निशान छोड़ घटने लगी। बीते 24 घंटे में नदी का जलस्तर 20 सेंटीमीटर नीचे आ गया। लेकिन तटवर्ती इलाके में लगाई फसलों को काफी नुकासान पहुंचा है।चारों तरफ सड़ांध और दुर्गन्ध है। मुक्तिधाम सहित कसबे की ऐतिहासिक धरोहरों पर संकट बरकरार है। नदी में कटान में तेजी उसी प्रकार हो रही है। कसबे की कई ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व ही संकट में है।
घाघरा का जलस्तर गौरीशंकर घाट पर रविवार को शाम चार बजे तक 69.93 मापा गया । यह स्तर खतरा बिंदु से महज तीन सेंटीमीटर ऊपर है। नदी के जल स्तर में 20 सेंटी मीटर कमी के बावजूद मुक्तिधाम खतरे की जद में है।पानी घटते ही श्मशानघाट पर कटाव तेज हो गया है। प्रशासन की सुस्ती से नगर वासियों में आक्रोश व्याप्त है।
घाघरा के तटवर्ती इलाके के लोगों ने जलस्तर घटने से कुछ राहत जरूर ली है। लेकिन फसलों के सड़ने से चारों तरफ दुर्गन्ध और सड़ांध फैली हुई है। नदी का जलस्तर घटने के बावजूद घाघरा अभी खतरे के निशान से तीन सेमी उपर बह रही है।गौरीशंकरघाट पर घाघरा का जल स्तर आज 69.93 मीटर रहा जबकि खतरे का निशान 69.90 मीटर है।अभी भी नगर सहित तटवर्ती इलाके के लोगों में भय व्याप्त है।
कटान से नगर की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें जैसे भारत माता मन्दिर, मुक्तिधाम ,दुर्गा मन्दिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला ,हनुमान मन्दिर ,डीहबाबा का मन्दिर और शाही मस्जिद का अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार नवली, चिउटीडांड, बहादुरपुर, सरया , पतनई, गोधनी, ठाकुरगांव बीबीपुर, ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, पाउस, कोरौली, बेलौली, चन्द्राबारी, महुआबारी, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गॉवों की हजारों एकड फसल अब भी पानी में डूबी हुई है।