अपने-अपने समर्थकों को पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड दिलाने के नाम पर ग्रामसभा बखरिया के दो गुट तहसील मुख्यालय पर आमने सामने हो गए। दोनों पक्ष एक-दूसरे और संबंधित लेखपाल के विरुद्घ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए उप जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ही भिड़ गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी को प़ुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाबुझाकर हटाने का प्रयास किया लेकिन दोनों पक्ष जिद पर अड़े थे। आखिरी पुलिस को सख्ती करनी पड़ी, तब दोनों पक्ष वहां से हटे।
बखरिया गांव के पूर्व प्रधान चंद्रदेव यादव बुधवार को अपने समर्थकों के साथ तहसील पर आकर पात्र गृहस्थी कार्ड बनाने में अनियमितता और गलत नाम चढ़ाए जाने की शिकायत उप जिलाधिकारी से की थी। जब इस बात की भनक दूसरे पक्ष के प्रधान मनोहर यादव को हुई तो वे शुक्रवार को अपने समर्थकों के साथ तहसील पहुंचकर जांच में अपात्र पाए गए लोगों के नाम काटकर वास्तविक पात्र नाम चढ़ाने की मांग करने लगे।
इसी बीच पूर्व प्रधान भी अपने समर्थकों समेत तहसील पर आ धमके। दोनों तरफ से एक दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी होने लगी। दोनों पक्ष एक दूसरे पर अपना राशन कार्ड कटवाने का आरोप लगाते हुए आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों में हाथापाई होते देख उप जिलाधिकारी सूर्यकांत त्रिपाठी ने थाने से भारी संख्या में पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाबुझाने की कोशिश की लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। इसपर पुलिस ने लाठियां पटकर सभी को खदेड़ा।
चंद्रदेव का कहना था कि गांव में कुल 312 कार्ड हैं जो पात्र हैं। उनका नाम काटकर फर्जी तरीके से लेखपाल जितेंद्र धर और अशोक सिंह आदि दूसरे लोगों का नाम चढ़ा रहे हैं। वहीं प्रधान मनोहर यादव का कहना था कि राशन कार्ड में गड़बड़ी को लेकर एसडीएम को आवेदन दिया गया था।
डीएम के निर्देश पर लेखपाल जितेंद्र धर द्विवेदी अशोक सिंह की टीम ने पात्र गृहस्थी के कार्डों का सत्यापन गांव में खुली बैठक करके कराया। उसमें 163 अपात्र लोगों का नाम काटकर अन्य 163 वास्तविक गरीबों के नामों को शामिल किया गया। रिपोर्ट उप जिलाधिकारी को दे दी। पूर्व प्रधान चंद्रदेव यादव सूची से नाम काटने का विरोध अपने समर्थकों के साथ तहसील पर आकर किए और काटे गए नामों को सूची में शामिल करने की मांग करने लगे। इसी को लेकर दोनों पक्षों में नोकझोंक के बाद मारपीट होने लगी।