बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्ध परिषदीय, सहायता प्राप्त तथा माध्यमिक विद्यालयों का शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा। इसे शुरू होने में चंद दिन ही बचे हैं, लेकिन अभी तक निदेशालय से नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें नहीं भेजी जा सकी हैं। ऐसे में बच्चों को बिन किताबों के ही पढ़ाई करनी पड़ सकती है। विभागीय अधिकारी क मानें तो दो दिनों में 11 लाख किताबें पहुंच जाएंगी।
जिले में 1716 परिषदीय, सहायता प्राप्त तथा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों मेेें लगभग दो लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सरकार की तरफ से पहली कक्षा से आठवीं कक्षा में अध्ययनरत बच्चों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित की जाती है। विभाग की तरफ से परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए नए शिक्षा सत्र से 116 परिषदीय विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का चयन तो कर दिया गया है, लेकिन अभी तक निदेशालय से नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों की खेप जिला मुख्यालय नहीं पहुंच सकी है। जबकि शिक्षा सत्र शुरू होने में चार दिन ही शेष हैं। विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही किताबें वितरित की जाएंगी। ऐसे में एक अप्रैल से इनका वितरित होना मुश्किल ही लग रहा है। ऐसे में विद्यालयों में एडमिशन लेने वाले बच्चे तथा अभिभावक पेशोपेश में है। अभिभावकों की मानें तो गत वर्ष भी नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें देर से आई थी। कई विद्यालयों में कुछ पाठ्यपुस्तकेें वितरित नहीं हो पाई थी। ऐसे में लेटलतीफी के चलते बच्चों को बिन किताबों के ही पढ़ाई करना पड़ सकता है।
परदहां ब्लाक क्षेत्र के पिपरीडीह निवासी अभिभावक सत्यप्रकाश यादव, सुशील कुमार, रविंद्र प्रसाद, मनोज राम का कहना था कि सरकार की तरफ से बच्चों के कल्याण के लिए तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती है, लेकिन बच्चों को योजनाओं का लाभ समय से नहीं मिल पाता है। गत वर्ष पाठ्यपुस्तकें देर से मिली। पूरा सेट नहीं मिल पाया।