करहां क्षेत्र के तिलसवां स्थित दुर्गा मंदिर में चल रहे श्री सप्तचंडी महायज्ञ के छठवें दिन शुक्रवार को कथावाचक कौशिक जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति का वास्तविक बल उसके चरित्र में निहित होता है।
कहा कि मर्यादा और नैतिक मूल्यों से ही समाज सशक्त बनता है, जबकि अहंकार और दुराचार अंततः पतन का कारण बनते हैं। भगवान राम अपने पिता के एक आदेश पर 14 वर्ष वन में जीवन बिताने के लिए तैयार हो गए थे।
उन्हें इस बात का कोई ग्लानि नहीं थी। माता, पिता और आचार्य का हमेशा सम्मान किया। उनके वचनों के पालन के लिए चाहे कुछ भी करना पड़े, कितना भी दुख उठाना पड़े, उसके लिए वह सहज रूप से तैयार हो गए।
भोग विलासिता की वस्तुएं हमें नरक के पास ले जाती है। व्यक्ति को सत्कर्म करने की जरूरत है। कलियुग में जो भक्त श्रद्धापूर्वक भगवान राम की कथा श्रवण करता है, उसके सारे पाप दूर हो जाते हैं।