दोहरीघाट के रौदा भगवानपुर गांव में नहर की दीवारों पर उभरी ईंटे और रिसता पानी। संवाद पड़ताल
मऊ/ कुसुम्हा। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल का 26.38 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकरण हुआ है। यहां आधुनिक मशीनें, नए मोटर पंप और पैनल लगाए गए। 26 सितंबर को जलशक्ति मंत्री ने फीता काटकर उद्घाटन भी किया था।
लेकिन कैनाल की दीवारें 70 साल पुरानी हैं। आधुनिक मोटर से निकलने वाली पानी की रफ्तार सहने वाली नहर की दीवारों की तरफ विभाग का ध्यान नहीं गया। 70 साल पुरानी नहर की दीवारें चटकने से ईंटें बाहर निकल गई हैं। इसके कारण रिसाव होने से रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
सोमवार को नहर का हाल जानने के लिए टीम पड़ताल पर निकली। पता चला कि अंदर से नहर की दीवारों में सीमेंट-बालू लगाकर मरम्मत कराई गई, लेकिन सतह पर अब भी काई जमी है। इससे पानी का रिसाव हो रहा है।
पक्की नहर की मरम्मत और सफाई के लिए हर साल 50 से 55 लाख रुपये का बजट सिंचाई विभाग को मिलता है। लेकिन नहर की स्थिति ये है कि अंदर काई की मोटी परत जम गई है। ऊपर झाड़ियां उग आई हैं।
वर्ष 1952 (प्रथम पंचवर्षीय योजना) में दोहरीघाट में सरयू नदी पर चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल का निर्माण हुआ था। बलिया के मालीपुर तक इसकी लंबाई 60 किलोमीटर है। 35.600 किलोमीटर हिस्सा मऊ जिले में है। इससे दोनों जिलों की 55 हजार हेक्टेयर खेती इसी पानी पर निर्भर है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना में बनी ये नहर एशिया की पहली नहर थी। सरयू नदी से 12 मोटर पंप के जरिये इसमें पानी छोड़ा जाता है। कई दशकों से ये नहर दोनों जिलों के हजारों किसानों का सहारा है। इस नहर से चार रजवाहे और 40 माइनर निकली हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखरेख के अभाव में नहर में मोटी सिल्ट (गाद) जमा हो गई है। जगह-जगह से दीवारों में दरारें आ गई हैं। किसानों का आरोप है कि कभी सफाई के नाम तो कभी दूसरे कारणों से पानी अक्सर बंद रहता है। लेकिन जब भी नहर चालू होती है फटी दीवारों से रिसाव से रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।