मऊ। आयुर्वेदिक दवाओं की ओर पांच साल में मरीजों का रुझान बढ़ा है। इससे ओपीडी में मरीजों की संख्या बीस फीसदी बढ़ी है। बावजूद इसके जिले में संचालित 29 आयुर्वेदिक अस्पताल में से से 10 में पांच साल से डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इन अस्पतालों का फार्मासिस्ट के सहारे संचालन हो रहा है।
कोरोना संक्रमण के बाद आयुर्वेद पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। यही कारण है मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिले के आयुर्वेद अस्पताल के ओपीडी में बढ़ती मरीजों की संख्या इसकी पुष्टि कर रही है।
जिले के 29 आयुर्वेदिक और छह यूनानी अस्पताल हैं। दस आयुर्वेदिक चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं है। जिले में आयुर्वेद के 34 चिकित्सकों की जगह 22 ही हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते वर्तमान में चितबसाव, गहनी, चकरा, दरगाह, दोहरीघाट, सलाहाबाद, नेमड़ाडा, बैलोरी, कटिहारी समेत 10 आयुर्वेद अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहे हैं। जबकि इन दिनों सभी आयुर्वेदिक अस्पताल में रोज 50 से 60 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वात, उदर, कब्ज, चर्म, सर्दी, खांसी, बुखार, मलेरिया, टाइफाइड और स्त्री रोग से संबंधित मरीज इलाज कराने आयुर्वेदिक अस्पताल पर आते हैं। इस बाबत क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सत्येन्द्र साहू का कहना है कि डाक्टरों की कमी के चलते कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट के उपचार करने की जानकारी है। गंभीर स्थिति पर उन्हें दूसरे आयुर्वेद अस्पताल भेजा जा रहा है। डाक्टरों की कमी को लेकर शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।