नगर के डीसीएसके पीजी कालेज में संगोष्ठी को संबोधित करतते प्रो० उदय प्रताप सिंह। स्रोत- स्वयं
हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज और डीसीएसकेपीजी कॉलेज मऊ के संयुक्त तत्वावधान में भारतेंदु हरिश्चन्द्र और भारत बोध विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन बृहस्पतिवार को हुआ।
मुख्य अतिथि उदय प्रताप सिंह ने कहा कि भारत बोध पराधीनता से स्वाधीनता की ओर बढ़ने का भाव है। उन्होंने भारतेन्दु के भारत बोध को भाषा, संस्कृति और इतिहास से जोड़ते हुए देशभर में हिंदी के प्रचार-प्रसार और स्वभाषा में उन्नति पर बल दिया।
उन्होंने कहा, जो ज्ञान हमें गुरु से मिल सकता है, वह पुस्तकों से नहीं। हमें परिपक्व होने के लिए गुरु की संगत आवश्यक है।
प्राचार्य सर्वेश पाण्डेय ने अंधेर नगरी’ का उदाहरण देते हुए औपनिवेशिक शासन पर व्यंग्य की चर्चा की। अभय कुमार राय ने भारतेन्दु को हिंदी साहित्य की गद्य विधाओं का जनक बताया।
धनंजय शर्मा और सीपी राय ने भारत दुर्दशा नाटक को भारत बोध का महत्वपूर्ण आधार बताया। जितेन्द्र पाण्डेय ने समाज के उद्धार को भारत बोध से जोड़ा।