ईरान, अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध का असर सिर्फ रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों के दामों और सप्लाई पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि इसका असर प्लास्टिक के दामों पर भी पड़ा है।
जनपद में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होने के बाद भी खरीद शुरू नहीं हो सकी है। पी फार्म प्लास्टिक दाने का दाम बढ़ने से प्लास्टिक की बोरी के दाम 17 रुपये से बढ़कर 24 रुपये हो गए हैं। इससे 48 क्रय केंद्रों पर बोरे का अभाव है।
मौसम खराब होने से आनन-फानन में कंबाइन से गेहूं की कटाई करने के बाद किसान उसे क्रय केंद्र पर बेचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे हैं।
अन्नदाता की इस लाचारी का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं, जो तय दर से कम कीमत पर किसानों से खरीद कर रहे हैं। विभाग की तरफ से गेहूं खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण भी कर लिया गया है। जनपद के संदर्भ में अब तक 48 क्रय केंद्र बनाए गए हैं।
करीब 17,500 मिट्रिक टन (1,75,000 क्विंटल) गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। प्रति किलो 25.85 रुपये कीमत भी तय कर दी गई है। इसके बावजूद बोरे की कमी से किसान क्रय केंद्रों पर आस भरी निगाहों से देख रहे हैं। जिनके पास भंडारण की क्षमता नहीं है या कम है, वे बिचौलियों को गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
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व्यापारी नेता रमाशंकर जायसवाल ने बताया कि युद्ध से पहले पी फार्म प्लास्टिक दाने का दाम 110 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब बढ़कर 185 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। यदि युद्ध जारी रहा तो इसके दामों में और उछाल आना तय है। पी फार्म प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से प्लास्टिक सामग्री बनाने की लागत भी बढ़ गई है, जिसका असर पूरे कारोबार पर पड़ रहा है। महंगी सामग्री के कारण कारोबारी असमंजस में हैं और दाना खरीदने का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। प्लास्टिक के दाम बढ़ने से गेहूं खरीद भी प्रभावित हो रही है। सरकारी क्रय केंद्रों पर प्लास्टिक की बोरी इस्तेमाल होती है, जिसके दाम 17 रुपये से बढ़कर 24 रुपये हो गए हैं। इसलिए केंद्र संचालक बोरों के अभाव में गेहूं की खरीद शुरू नहीं कर पा रहे हैं। गल्ला कारोबारी भी इससे परेशान हैं।
92000 हेक्टेयर में हुई है गेहूं की खेती
जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि जनपद में करीब 92000 हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई है। आंकड़ों के अनुसार करीब 20 फीसदी गेहूं की कटाई हो चुकी है। मौसम को देखते हुए किसान तेजी से गेहूं की कटाई कर रहे हैं।
एक अप्रैल से गेहूं खरीद की तारीख रखी गई है, लेकिन जनपद में किसी भी क्रय केंद्र पर बोरा नहीं है। किसान निराश होकर वापस जा रहे हैं। वे मजबूर होकर बिचौलियों को बेचने को मजबूर हैं। शासन को जल्द व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसान अपना गेहूं बेच सके। -देव प्रकाश राय, किसान नेता, निवासी शहरोज
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से प्लास्टिक के दामों में इजाफा हुआ है, जिससे खरीद की दर तय नहीं हो सकी है। क्रय केंद्रों पर जल्द बोरे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है। -विनय प्रताप सिंह, जिला खाद विपणन अधिकारी