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Mau News: चार साल से कागजों में संचालित हो रहा जिला अस्पताल का जेरियाट्रिक वार्ड

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जिले के सबसे बड़े 100 बेड वाले जिला अस्पताल में बीते चार वर्षों से बुजुर्ग मरीजों के लिए जेरियाट्रिक वार्ड केवल कागजों पर संचालित हो रहा है। जुलाई 2021 में इसे बाकायदा एक वार्ड में शुरू किया गया था, लेकिन करीब एक माह बाद ही इसे लू वार्ड में तब्दील कर दिया गया। इसके बाद से अब तक बुजुर्ग मरीजों के लिए यह सुविधा केवल कागजों में ही संचालित हो रही है।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो रोजाना 800 से अधिक ओपीडी मरीजों में 150 से ज्यादा बुजुर्ग होते हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन वार्ड के संचालन को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसका संचालन शुरू किया जाएगा।
जुलाई 2021 में जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के एक हिस्से को जेरियाट्रिक वार्ड के रूप में विकसित किया गया था। यहां बुजुर्ग मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए 24 घंटे चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था की गई थी।
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उस समय अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि शासन के निर्देश पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीजों के लिए 10 बेड का अत्याधुनिक जेरियाट्रिक वार्ड बनाया गया है।
इस वार्ड में एक माह तक 20 से अधिक मरीजों का इलाज किया गया था। इनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हार्ट अटैक समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज शामिल थे। मरीजों की देखभाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स और दो सेनेटरी अटेंडेंट की तैनाती की गई थी। ओपीडी में आने वाले गंभीर बुजुर्ग मरीजों को यहां भर्ती किया जाता था।
हालांकि, करीब एक माह बाद ही इस वार्ड को लू वार्ड में बदल दिया गया। बीते चार वर्षों से यह वार्ड लू वार्ड के रूप में उपयोग हो रहा है, जहां केवल गर्मी के मौसम में मरीज भर्ती किए जाते हैं। शुक्रवार को पड़ताल के दौरान वार्ड पर ताला लटका मिला। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि अवकाश पर हूं। प्रभारी सीएमएस डॉॅॅॅ. सीपी आर्या का कहना है कि मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।


कैंसर मरीज को इमरजेंसी वार्ड में कराना पड़ा भर्ती
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती 65 वर्षीय अजय सिंह, जो पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्हें जेरियाट्रिक वार्ड की सुविधा न मिलने के कारण इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराना पड़ा। इसी तरह वार्ड में भर्ती दुबारी निवासी राम मिलन ने बताया कि उन्हें इस वार्ड की सुविधा की जानकारी ही नहीं थी। वह बीते तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और शुक्रवार को छुट्टी लेकर घर लौट गए।

ये है जेरियाट्रिक वार्ड
जिन अस्पतालों में बुजुर्ग मरीजों की संख्या अधिक होती है, वहां जेरियाट्रिक वार्ड बनाया जाता है। इस वार्ड में ऐसे बुजुर्ग मरीजों को भर्ती किया जाता है, जो सामान्यतः मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया जैसी कई बीमारियों से ग्रसित होते हैं और जिन्हें उम्र के अनुसार विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इन वार्डों में आरामदायक बेड, व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। यहां ब्लड जांच, शुगर जांच, ईसीजी और दवाओं जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध रहती हैं, जिससे बुजुर्ग मरीजों को लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ता। साथ ही उनकी देखभाल के लिए अलग स्वास्थ्यकर्मी और नर्सिंग स्टाफ भी तैनात किया जाता है।
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