समाजवादी पार्टी कार्यालय पर शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 89वीं जयंती मनाई गई। इस दौरान उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने उन्हें समाजवाद का सजग प्रहरी बताते हुए कहा कि वह गरीबों की आवाज थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शिवप्रताप यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का जन्म बलिया जनपद के इब्राहिमपट्टी गांव में 17 अप्रैल 1926 को हुआ।
उनकी प्राथमिक शिक्षा दीक्षा गांव के विद्यालय पर ही हुई। मऊ जनपद से भी उनका गहरा लगाव रहा। इब्राहिमपट्टी जनपद मऊ के बार्डर पर ही बसा है। उनकी शिक्षा मऊ जनपद में भी हुई।
कहा कि गांव से लेकर संसद तक के सफर में उनके सामने अनेकों मोड़ आए, लेकिन उन्होंने हमेशा समाजवाद की वकालत की। कांग्रेस में रहते हुए भी उन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया।
इसके चलते उन्हें युवा तुर्क की उपाधि मिली। पूर्व विधायक सुभाष यादव ने कहा कि समाजवाद के संघर्ष में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर अग्रणी नेताओं में थे। जिला उपाध्यक्ष संजय पाण्डेय ने कहा कि पूर्वांचल के लिए यह गौरव का विषय है कि इस धरती ने देश का नेतृत्व किया और समाजवाद के आंदोलन को शीर्ष स्तर पर पहुंचाया।
कहा कि किसी भी पार्टी में रहकर नीतियों को लेकर उसी का विरोध करना एक सामान्य राजनेता के बस की बात नहीं है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने यह कदम उठाकर पूरे देश के नेताओं को सिद्धांत की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर मुख्य रूप से रामधनी चौहान, संध्या यादव, श्रीराम चौहान, सतानंद यादव, शोएब नोमानी, नन्हकू राजभर, जयनाथ राजभर, नसीम अहमद, मनोज यादव, रवींद्र खरवार, धर्मप्रकाश यादव, राकेश शर्मा, एकलाख अहमद आदि उपस्थित रहे।
उधर, घोसी में जन स्वराज संगठन की ओर से नगर स्थित शिव मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। साथ ही उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर मीरा सिंह, पूनम सिंह, नितेश सिंह, अमित सिंह, अरविंद पांडेय, मनोज सिंह, अरविंद आदि शामिल थे।