भुखमरी के कगार पर पहुंचे एहसान मियां और उनकी पत्नी जोहरा।
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चार महीने से लकवाग्रस्त एहसान मियां (62) और उनकी पत्नी को दो जून की रोटी के लाले पड़ गए हैं। मुहल्ले के लोगों की मदद पर इनके घर चूल्हा जलता है। इस परिवार के पास न तो राशन कार्ड और न ही उज्ज्वला का रसोई गैस सिलिंडर है।
अमिला के वार्ड आठ निवासी एहसान को पांच वर्ष में तीन बार लकवा मार गया। इससे उबरे नहीं थे कि चौथी बार भी लकवा मारने पर वह चार महीने से पूरी तरह चारपाई पर हैं। रुपयों के अभाव में इलाज नहीं हो पा रहा है तो दो जून की रोटी के भी लाले पड़े हैं।
पत्नी जोहरा ख़ातून बताती हैं कि हमारा इस दुनिया में कोई नहीं है। जब तक पति के हाथ पैर चलते थे, रोटी के लिए मोहताज नहीं थे। इधर चार महीने से वह चारपाई पर हैं। कोई रिश्तेदार या फिर रहम दिल इंसान तरस खाकर 100 से 200 रुपये दे देता है तो इनकी दवा की व्यवस्था कर लेती हूं, लेकिन अक्सर रोटी की व्यवस्था नहीं हो पाती है।
बताया कि आठ वर्ष पहले कार्ड था। लेकिन उसे भी कोई कटवा दिया गया। चेयरमैन वंदना गुप्ता व उनके पति अजय कुमार गुप्ता से कहने के बाद भी राशन कार्ड नहीं बन सका।
चेयरमैन प्रतिनिधि अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि इनके राशनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करवा दिया गया है। एसडीएम घोसी डा. सीएम सोनकर का कहना है कि दंपती की हर संभव मदद की जाएगी।