बाल स्वास्थ्य एवं संरक्षण कार्यक्रम की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिलाधिकारी चंद्रकांत पांडेय एक एएनएम सेंटर और आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचे।
एक एएनएम उनके सामने बीपी नहीं माप सकी। डीएम ने खुद महिला का रक्तचाप जांचा और रजिस्टर में नोट कराया। केंद्र पर न तो कोई रजिस्टर मिला और न ही शिशुआें, बच्चों और गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण का रिकार्ड मिला।
पहली फरवरी से तीन महीने के लिए बाल एवं महिला पोषण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण करते हुए जांच की जानी है।
उन्हें रक्त की कमी दूर करने वाली विटामिंस, आयरन की गोलियां, औषधियां और पुष्टाहार दिया जाना है। ऐसे बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करके रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों के माध्यम से डीएम को दी जानी है।
कार्यक्रम की वास्तविकता जानने के लिए खुद जिलाधिकारी कापेागंज ब्लाक के एएनएम सेंटर और आंगनबाड़ी केंद्र खुखुंदवा पहुंचे। डीएम के पहुंचते ही अफरातफरी का माहौल बन गया।
डीएम के मांगने पर एनएम कोई रजिस्टर नहीं दिखा सकी। एक महिला का रक्तचाप मापने के लिए डीएम ने एएनएम को कहा तो वह विफल रही। डीएम ने स्वयं ही महिला का रक्तचाप लिया और उसे रजिस्टर में नोट कराया।
केंद्र पर गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण का कोई रजिस्टर नहीं बनाया गया था। इसके बाद डीएम आंगन बाड़ी केंद्र पहुंचे। वहां न तो पुष्टाहार मिला और न ही पुष्टाहार वितरण के रजिस्टर में कोई इंट्री।
इस स्थिति पर जिलाधिकारी ने काफी नाराजगी जताई। डीएम ने सीएमओ डा. नंदलाल यादव ,सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डा. पीके राय, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सुनीता सिंह , सुपरवाइजर सोमारी यादव और सहायिका शशिकला का स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया।