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UP Crime: 12वीं की परीक्षा में सामूहिक नकल के मामले में आठ शिक्षकों को सजा, 10 साल बाद कोर्ट का आया फैसला

Sat, 28 Feb 2026 09:44 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।

सार

मऊ जिले में सामूहिक नकल कराने के मामले में 10 साल बाद आठ शिक्षकों को चार-चार महीने की सजा सुनाई गई। वहीं दो-दो हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने 2015 में सामूहिक नकल के मामले में आठ शिक्षकों को दोषी पाते हुए चार-चार महीने की सजा सुनाई। साथ ही दो-दो हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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अदालत ने टिप्पणी की कि परीक्षा की स्वच्छता व पारदर्शिता बनाए रखने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। दोषसिद्ध व्यक्तियों को इस बात का अहसास होना चाहिए कि उनके द्वारा अपराध किया गया बल्कि पीड़ित पक्ष को भी यह अहसास होना चाहिए कि उसके साथ न्याय हुआ है।

मामला कोपागंज थाना क्षेत्र के कृषक इंटर कॉलेज संतपुर गोड़सरा में वर्ष 2015 में इंटरमीडिएट अंग्रेजी प्रथम प्रश्न पत्र की परीक्षा में सामूहिक नकल का है। इस मामले में नामजद 22 लोगों में सुनवाई के बाद 8 को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी पाया, जबकि शेष आरोपियों की पत्रावली अलग कर दी गई थी। सीजेएम ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई के बाद अपने आदेश मे लिखा कि इंटरमीडिएट अंग्रेजी प्रथम प्रश्न पत्र की परीक्षा के प्रश्नों का उत्तर छात्रों को बोल-बोल कर लिखवाया गया है।
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सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और सुनवाई के बाद रामप्रवेश यादव, अंगद वर्मा, कमलेश कुमार यादव, उदय नारायण यादव, कृष्णानंद मौर्य, वीरेंद्र चौहान, रविंद्र नाथ पटेल और धर्मेंद्र विश्वकर्मा को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी पाया।

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तत्कालीन डीआईओएस बृजेश कुमार ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
सामूहिक नकल की शिकायत मिलने के बाद डीएम और डीआईओएस बृजेश कुमार ने कृषक इंटर कॉलेज में छापे मारे थे। संदिग्ध गतिविधियां मिलने पर दोनों अधिकारियों ने छात्रों की कापी चेक की। एक जैसा जवाब लिखा मिला, वहीं पूछने पर विद्यार्थी कॉपी में लिखे उत्तर को नहीं बता पाए थे। इससे स्पष्ट हुआ कि यहां छात्रों को सामूहिक रूप से बोलकर नकल कराई गई थी।

इसके बाद इस मामले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव अमरनाथ वर्मा के निर्देश पर डीआईओएस ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। साथ ही कॉलेज को ब्लैक लिस्टेड कर परीक्षा निरस्त कराकर दुबारा कराई गई। कॉलेज प्रबंधक सहित कालेज के 22 शिक्षकों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इस मामले में न्यायालय में न आने पर 22 में से 14 लोगों की पत्रावाली अलग कर दी गई। वहीं नियमित आने वाले 8 लोगों की अलग पत्रावली की सुनवाई की जा रही थी। जिसमें यह फैसला सामने आया।
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