जिले के मऊ डिपो में 56 चालकों की कमी से करीब 10 बसें रोज खड़ी रहती हैं। डिपो में कुल 68 बसों के संचालन के लिए 144 चालकों की जरूरत है, लेकिन इसके सापेक्ष अभी केवल 88 चालक हैं। अब तक 10 बार भर्ती कैंप लगाया गया पर पद भरे नहीं जा सके।
इससे ग्रामीण रूटों के साथ लंबे रूटों पर बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। जहां यात्रियों को दिक्कत हो रही है, वहीं हर दिन डिपो को एक से डेढ़ लाख रुपये तक के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
मऊ डिपो से गोरखपुर, लखनऊ, बलिया, आजमगढ़ सहित अन्य रूटों पर 68 बसें चलती थीं, लेकिन बीते चार-पांच वर्षों से चालकों की कमी के चलते 15 फीसदी बसों का संचालन ठप है।
नियमानुसार प्रत्येक बस पर 2.16 चालक के हिसाब से दो से अधिक चालकों की जरूरत होती है।
ऐसे में 68 बसों के लिए 144 चालकों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में डिपो में केवल 88 चालक ही तैनात हैं। यानी अभी 56 चालकों की कमी है। ऐसे में चालकों की कमी के चलते 10 से ज्यादा बसें डिपो में ही खड़ी रह जाती हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, 88 चालकों में भी छह से सात चालक लगभग हर समय अवकाश पर रहते हैं, जिसकी वजह से अन्य चालकों की जरूरत और बढ़ जाती है। चालकों की कमी के चलते जहां पहले लखनऊ के लिए 25 बसें, गोरखपुर के लिए 20, वाराणसी के लिए दो, प्रयागराज के लिए आठ तथा शाहगंज, अयोध्या सहित दूसरे रूटों पर 13 बसों का संचालन होता था, वहीं अब इन रूटों पर बसों की संख्या कम की जा रही है।
पहले ग्रामीण रूट चिरैयाकोट-बढ़ुआगोदाम, धवरियासाथ मार्ग और मधुबन रूट पर संचालन बंद किया गया था, लेकिन लोगों के विरोध के बाद अब इन रूटों के बजाय महानगर रूटों पर बसों की संख्या कम कर विकल्प खोजने में निगम के जिम्मेदार जुटे हैं।