युवा बेरोजगारों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी कौशल विकास योजना लक्ष्य से भटक सी गई है। गरीब बेरोजगार युवाओं के दिल में ही रह गई कौशल विकास से रोजगार की इच्छा। कच्छप गति से दिए जा रहे प्रशिक्षण पूरे ही नहीं हो पाए हैं। युवाओं को रोजगार दिलाने में भी यह योजना काफी पीछे है।
जिले में इस योजना के लिए एक लाख से अधिक युवाओं ने आनलाइन आवेदन किया था। लेकिन महज 3026 आवेदकों को इस योजना में प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया। राज्य सरकार द्वारा नामित चार कंपनियों के माध्यम से जिले के 16 केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया गया है। लेकिन अभी तक साढे़ तीन सौ प्रशिक्षुओं की अंतिम परीक्षा ही नहीं कराई जा सकी। रोजगार उपलब्ध कराने में भी योजना फिसड्डी साबित हो रही है।
21 दिसंबर 2012 को कौशल विकास योजना का जिस तरीके से प्रचार प्रसार किया गया। उससे लगा कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने में यह योजना काफी कारगर साबित होगी। एक लाख आवेदकों के सापेक्ष महज तीन हजार 3026 आवेदक ही चयनित किए गए। श्री टेक्नालाजी, सोसाइटी फार ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट प्रमोशन, नेक्सचेन एडो साल्युशन और इंडिग्राम कंपनियों को युवाओं को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई। जिले में रतनपुरा मर्यादपुर, घोसी और जिला मुुख्यालय सहित 16 केंद्रों पर प्रशिक्षण की सुविधा दी गई।
वर्ष 2013 -14 के वित्तीय वर्ष में 1815 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। जबकि अगले वित्तीय वर्ष के लिए 1211 अभ्यर्थी चयनित किए गए। पहले वित्तीय वर्ष के लिए 27 प्रशिक्षुुओं के 68 बैच बनाए गए। जबकि 1211 प्रशिक्षुुओं के लिए 15 बैच बनाए गए। इनमें केवल 50 बैचों के ही प्रशिक्षुओं का प्रशिक्षण पूरा हो पाया। जबकि 33 बैचों के 891 प्रशिक्षुओं की अभी तक परीक्षा ही नहीं हो सकी है।