मऊ/घोसी। जिले की घोसी विधानसभा सीट से सपा विधायक सुधाकर सिंह चार दशक तक सपा के जमीनी कार्यकर्ता रहे। वे किसान और एससी एसटी वर्ग के लोकप्रिय नेता थे। सुधाकर सिंह के निधन से हर वर्ग के लोग मर्माहत है। सुधाकर सिंह 1996 में सपा के टिकट पर नत्थूपुर विधानसभा सीट (2012 के परिसीमन के बाद घोसी नाम किया गया) से पहली बार विधायक बने थे।
सुधाकर सिंह 1985 में छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए। सपा जिलाध्यक्ष दूधनाथ यादव के मुताबिक, सपा विधायक सुधाकर सिंह ने 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर नत्थूपुर विधानसभा सीट (2012 के परिसीमन के बाद घोसी नाम किया गया) से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस की डॉक्टर सुधा राय को हराया था। उन्होंने साल 2012 में भी घोसी से बतौर सपा प्रत्याशी भाजपा के प्रत्याशी फागू चौहान को हराया था। इसके बाद साल 2017 में दोबारा घोसी से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 2019 में फागू चौहान के राज्यपाल बनने पर वे उप चुनाव में उतरे लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2022 में सपा ने टिकट नहीं दिया था, जिसके चलते उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। 2023 के घोसी के उपचुनाव में सुधाकर सिंह, भाजपा के दारा सिंह चौहान को 42,759 वोट से हराकर तीसरी बार विधायक बने। नत्थपुर विधानसभा सीट पर जीत से पहले एक बार निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके थे, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दिवंगत सुधाकर सिंह अपने 40 वर्ष के राजनीतिक कॅरिअर में छह बार विधानसभा का चुनाव लड़े थे।
17 साल की उम्र में जेल गए थे सुधाकर सिंह
घोसी। नगर से सटी ग्राम पंचायत भावनपुर निवासी कुलदीप सिंह के चार पुत्रों में तीसरे नंबर के पुत्र सुधाकर सिंह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय थे। आपातकाल के दौरान मात्र 17 वर्ष की उम्र में जयप्रकाश नारायण के समग्र क्रांति आंदोलन में भाग लेने के कारण वे जेल भी गए थे। जेल से निकलने के बाद सुधाकर सिंह ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री बने। 1977-78 व 1978-79 सत्र में सर्वोदय डिग्री कॉलेज घोसी के अध्यक्ष चुने गए।