सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाए जाएंगे। इन स्कूलों में हर महीने डॉक्टर्स बच्चों का चेकअप भी करेंगे। उन बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को साझा किया जाएगा। जिसकी सूचना उनके अभिभावकों को भी दी जाएगी। इसके लिए बच्चों को प्रोफार्मा उपलब्ध कराए गए हैं। योजना में कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्रों को शामिल किया जा रहा है।
जिले में सीबीएससी से संबद्ध 26 कॉलेज हैं। जिनमें 26 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा हासिल कर रहे। खेलकूद को बढ़ावा देने के उद्देश्य के तहत छात्र छात्राओं को फिट रखने के लिए विभागीय कवायद तेज कर दी गई है। स्कूलों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के ‘हेल्थ रिपोर्ट कार्ड’ बनाए जाएंगे। सरकारी स्कूलों के अधिकारियों की मानें तो केंद्रीय विद्यालय तथा जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्र छात्राओं के स्वास्थ्य से जुड़े सभी डाटा रखे जाते हैं। लेकिन सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में छात्रों से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी डेटा उपलब्ध नहीं रहते। अब सीबीएसई ने इसे अनिवार्य कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके अभिभावक को जागरूक किया जाएगा। पहले अभिाभावक बच्चों का चेकअप कराएंगे। सीबीएसई का ‘हेल्थ एंड एक्टिविटी कार्ड’ बनाने का उद्देश्य बच्चों में मोटापा होना, खेलकूद में हिस्सा लेने की इच्छा न होना।
छोटे बच्चों में तमाम तरह की बीमारी होने से रोकना है। इसको लेकर हर महीने अभिभावक और टीचर की मीटिंग होगी। जिसमें बच्चों के रिपोर्ट कार्ड से जुड़ी जानकारी उनसे साझा की जाएगी। इसमें अभिभावकों से भी सुझाव मांगे जाएंगे। स्कूल सप्ताह में एक दिन तय करेंगे जिसमें हर क्लास के बच्चे का चेकअप होगा।
सनबीम स्कूल की प्रधानाचार्य पूनम तिवारी का कहना है कि सीबीएसई की अच्छी पहल है। अभिभावकों से सहमति ले ली गई है। कालेज में मेडिकल टीम बुलाकर छात्र छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा।
छात्र छात्राओं का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा। इसके लिए बच्चों को उपलब्ध कराए गए प्रोफार्मा के तहत पहले अभिभावक बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण करा कर उसे विद्यालय में जमा कराएंगे। उसके बाद विद्यालय की ओर से चेकअप कराया जाएगा।
पीएल जैसी, जिला कोआर्डिनेटर सीबीएसई बोर्ड