मऊ। केंद्र सरकार की तरफ से एक फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट को लेकर जिले के उद्यमियों को काफी उम्मीदें हैं। कोरोना की दूसरी लहर का असर उद्योग धंधों पर पड़ा है। हालांकि सरकार की ओर से दी गई राहत से पटरी पर लौट ही रहा था कि एक बार फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने से उद्योग धंधों की रफ्तार धीमी हो गई है। बजट को लेकर उद्यमियों से बातचीत की गई तो सभी ने लघु उद्योगों के लिए आर्थिक पैकेज दिए जाने की वकालत की। साथ ही कुछ छूट और रियायत मिले तो उस संजीवनी से यह उद्योग रोजगार सृजन और राजस्व में अप्रत्याशित बढ़ोतरी लाएगा।
बजट के मामले में जिले के उद्यमी पार्थ जालान ने बताया कि केंद्र तथा प्रदेश सरकार की तरफ से लघु उद्योगों को दी गई रियायतों से कारोबार रफ्तार पकड़ा ही था कि कोरोना संक्रमण बढ़ने से उद्योग धंधों पर एक बार फिर असर पड़ने लगा है। डेयरी उद्योग को बढ़ावा दिए जाने के लिए सब्सिडी दिया जाए। जब किसान खुशहाल होगा तो हमारा भी उद्योग प्रगति करेगा। साथ ही कोरोना महामारी में लघु उद्योगों के लिए सरकार अलग से आर्थिक पैकेज जारी करे।
वहीं उद्यमी अनमोल राय ने कहा कि गत वर्ष केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को फिर से जीवंत करने के लिए कई प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा की थी। जिससे लघु उद्योग को राहत मिली थी। ऐसे में इस बार भी देश की अर्थव्यवस्था पर कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन वैरिएंट का साया है तो कुछ बड़े प्रोत्साहन पैकेज जारी हो। ताकि उद्योगों को बढावा मिल सके।
उधर कारोबारी विनोद पांडेय ने कहा कि कोरोना से एमएसएमई सेक्टर प्रभावित हुआ है। जीएसटी की दरों को इस सेक्टर के लिए उपयुक्त बनाया जाए। टैक्स की दरों को कम किया जाए। उत्पादन में गिरावट, नौकरियों में कमी, राजस्व में कटौती जैसी कई समस्याओं का सामना एमएसएमई सेक्टर को पिछले दो सालों में करना पड़ा है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स जीएसटी की दरों पर एक बार फिर विचार किया जाना चाहिए।
महिला कारोबारी सरिता पांडेय ने बताया कि पिछले दो साल से हम लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना की महामारी ने उद्योग और कारोबार को बहुत नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, अब हालात पटरी पर लौट रहे हैं। सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों को राहत के लिए कई कदम उठाए हैं। इस बार बजट में वित्त मंत्री को महिला उद्यमियों के लिए बड़े ऐलान करने चाहिए।