समाजवादी पार्टी के कुनबे में इन दिनों चाचा-भतीजे के बीच चल रहे झगड़े से जिले का सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। जिले में दिनभर चर्चा के केंद्र में सपा ही रही। कोई चाचा के सिर दोष मढ़ रहा है तो कोई भतीजे पर। समाजवादी पार्टी के जिले के नेता भी अपने-अपने ढंग से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।जिले में भी चाचा-भतीजे के अलग-अलग समर्थक हैं। इसमें युवाओं की टीम जहां मुख्यमंत्री से अधिक जुड़ी है, तो वहीं कई पुराने कद्दावर नेता शिवपाल यादव के प्रति समर्पित हैं। पुराने समाजवादियों का मानना है कि यदि पार्टी में यह राजनीतिक उठापठक जल्द ही बंद नहीं हुई, तो डैमेज कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा।
मंगलवार को पार्टी एवं परिवार में हुए राजनीतिक उठापठक का असर यह रहा कि शाम होते-होते कई नेता लखनऊ रवाना हो गए। इनमें जहां कुछ शिवपाल तो कुछ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थक हैं। इस संबंध में पार्टी के एक नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस राजनीतिक उठापठक का परिणाम चाहे जो हो लेकिन नुकसान पार्टी को ही उठाना पड़ेगा। एक नेता का कहना है कि पूरी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव हैं।
उन्होंने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है तो निश्चित रूप से कोई कारण होगा। बताया कि इसके एक माह पहले मुख्तार अंसारी की पार्टी के विलय को लेकर भी इसी प्रकार का हंगामा खड़ा हो गया था। लेकिन मुलायम सिंह यादव ने मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बात को माना और मुख्तार अंसारी की पार्टी के विलय के मामले को दरकिनार कर शिवपाल यादव के निर्णय को झटका दिया।इस मामले में हालांकि पार्टी में शिवपाल यादव के खास माने जाने वाले मंत्री बलराम यादव को बर्खास्तगी का मुंह देखना पड़ा वहीं इस बार भी राजकिशोर सिंह एवं गायत्री प्रजापति पर गाज गिरी है।