मऊ। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट अनिल कुमार वर्मा की अदालत ने घर में घुसकर बलवा, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में नामजद छह आरोपियों को दोषी करार दिया।
दोषी पाए जाने के बाद अदालत ने सभी को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत के साथ रिहा कर दिया। मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार उतराई गांव निवासी अलगू पासवान पुत्र स्व. रमाकांत पासवान की तहरीर पर मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
वादी का आरोप था कि पांच सितंबर 2011 को गांव के ही धर्मेंद्र साहनी पुत्र देवेंद्र साहनी, श्याम बिहारी पुत्र राजधारी साहनी, हरिद्वार साहनी पुत्र केदार साहनी, सुभाष साहनी पुत्र बिहारी साहनी, लखपतिया तथा सुल्तान अहमद पुत्र अलीमुद्दीन ने रंजिश के चलते उसके घर में घुसकर बलवा किया और उसके साथ मारपीट की। आरोपियों पर गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने आठ गवाह पेश कर अपना पक्ष रखा। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपियों को झूठा फंसाए जाने की दलील दी।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद धर्मेंद्र साहनी, श्याम बिहारी, हरिद्वार साहनी, सुभाष साहनी, लखपतिया और सुल्तान अहमद को बलवा, मारपीट, घर में घुसने, गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में दोषी पाया।
अदालत ने दोषी पाए गए सभी छह आरोपियों को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए रिहा कर दिया और उन्हें एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत दी।