अब जिले के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा करना आसान नहीं होगा। बच्चों तथा शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए शिक्षा दूत नामक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों के कल्याण के लिए शासन की ओर से मिड-डे-मील, फल, दूध वितरण, नि:शुल्क ड्रेस सहित तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती है। विद्यालयों में कागज में तो शिक्षकों द्वारा बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाई जाती है, लेकिन अधिकारियों के निरीक्षण में बच्चों की उपस्थिति कम मिलती है।
शिक्षक भी नदारद मिलते हैं। शासन प्रशासन की ओर से शैक्षिक गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए शिक्षा दूत नामक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। जिसके माध्यम से सभी विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता मे सुधार, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की लाइव उपस्थिति पर नजर रखी जाएगी। साफ्टवेयर से पता चल जाएगा कि कितने शिक्षक तथा विद्यार्थी उपस्थित हैं। मिड डे मिल की जांच, शिक्षकों की अवकाश लेने की सुविधा, शिक्षकों की शिकायत निस्तारण तथा विद्यालयों चल रहे विभिन्न प्रकार की योजनाओं की आनलाइन मॉनीटरिंग की जाएगी।
आनलाइन रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा विद्यालयों की ग्रेडींग की जाएगी । साथ ही साथ विद्यालय होने वाले सभी क्रियाकलापों पर नजर रखना संभव हो सकेगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। इस बाबत जिला समन्वयक समेकित शिक्षा अमित कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि छह सितंबर को शिक्षा दूत साफ्टवेयर से आनलाइन मानीटरिंग शुरू हो जाएगी। छह सितंबर को ही जिलाधिकारी उद्घाटन करेंगे।