स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से आंखों में तनाव, गर्दन दर्द, अनिद्रा और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
एनसीडी क्लीनिक और मनोचिकित्सक के पास रोजाना 10 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। दो वर्ष पहले तक यह संख्या महज दो से तीन हुआ करती थी। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला अस्पताल ने मोबाइल के बढ़ते दुष्प्रभावों से बचाव के लिए मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र खोलने की योजना तैयार की है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
इस केंद्र के स्थापित होने पर मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से होने वाली समस्याओं के संबंध में काउंसिलिंग की जाएगी। साथ ही उपचार के लिए एनसीडी क्लीनिक की तर्ज पर अलग केंद्र की सुविधा उपलब्ध होगी।
बताया गया कि जिले में मनोविकारों तथा आत्महत्या के मामलों में भी वृद्धि हुई है। इस माह पांच अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं।
इनमें चार मामलों को तनाव से जुड़ा बताया गया है, जबकि एक मामले में युवक ने पड़ोसी द्वारा मारपीट के बाद फांसी लगाकर जान दे दी। दूसरी ओर जिला अस्पताल में मनोविकार तथा मोबाइल फोन के अत्यधिक प्रयोग से जुड़ी बीमारियों के मामलों में 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि मनोविकारों, आत्महत्या की रोकथाम तथा मोबाइल के बढ़ते प्रयोग से शरीर पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को कम करने के लिए जिला अस्पताल में मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र खोला जाएगा।
शासन की ओर से मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग करते-करते युवा, किशोर और अन्य आयु वर्ग के लोगों में नई प्रकार की समस्याएं सामने आ रही हैं।
अत्यधिक मोबाइल प्रयोग से आंखों में सूखापन बढ़ रहा है। कई बच्चों में मोबाइल न मिलने या उपयोग से रोकने पर आक्रामक व्यवहार भी देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एनसीडी क्लीनिक में अप्रैल माह में परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद तीन मामले पहुंचे थे, जिनमें कम अंक आने, अनुत्तीर्ण होने, मोबाइल गेम खेलने और अन्य कारणों से तनाव तथा आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसे लक्षण देखे गए।
बताया कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डिस्ट्रिक्ट काउंसिलिंग सेंटर (डीसीसी) पर जिला चिकित्सालय में स्थापित मन-कक्ष में दी जा रही सुविधाओं के साथ मोबाइल नशा मुक्ति और आत्महत्या रोकथाम संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है। यहां काउंसिलिंग के साथ आवश्यकतानुसार दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि जिला चिकित्सालय में मानसिक बीमारियों के लिए ‘मन-कक्ष’ पहले से स्थापित है। यहां सभी को नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से सिरदर्द, थकान, बेचैनी, शारीरिक कमजोरी और नींद में अनियमितता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
मोबाइल प्रयोग से बढ़ रही प्रमुख समस्याएं
एनसीडी क्लीनिक के नोडल और एसीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि एनसीडी क्लीनिक में मोबाइल फोन के प्रयोग से होने वाले बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसमें अधिकांश में डिजिटल आई स्ट्रेन है, जिसमें लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, धुंधलापन और सिरदर्द की समस्या होती है। इसके बाद दूसरे नंबर टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के मरीज है। इसमें झुककर मोबाइल चलाने से गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी में गंभीर दर्द होने लगता है। वहीं तीसरे नंबर पर अनिद्रा की बीमारी के मरीज है। इसमें रात में सोने से पहले मोबाइल की ब्लू लाइट नींद लाने वाले हार्मोन (मेलाटोनिन) को रोकती है। इसके अलावा सोशल मीडिया की लत और लगातार नोटिफिकेशन से ध्यान केंद्रित करने में कमी (कम एकाग्रता) और एंग्जायटी की समस्या सामने आ रही है।
ऐसे कर सकते हैं बचाव
20-20-20 नियम अपनाएं : हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें।
स्क्रीन-फ्री समय रखें : सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दें।
सही पॉश्चर अपनाएं : मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें ताकि गर्दन पर दबाव न पड़े।
डिजिटल डिटॉक्स करें : स्क्रीन टाइम लिमिट तय करें और गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद रखें।