मऊ। यात्रा करने के दौरान सड़कों के किनारे लगें बोर्ड को पढ़कर भी अभिभावक अपने बच्चों के जीवन के प्रति सचेत नहीं होते, उल्टा कम उम्र में बेटे के बाइक चलाने पर अभिभावक खास तौर पर मां काफी खुश होती है। लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनकी लापरवाही एक दिन उनके बच्चे के लिए भारी भी पड़ सकती है। ऐसा कुछ जिले के सुप्रसिद्घ विद्यालयों में हेलमेट अभियान के दौरान पड़ताल करने पर देखने को मिला। यहां कक्षा दसवीं के छात्र भी बिना हेलमेट के बाइक से फर्राटा भरते हुए विद्यालय पहुंच रहें है। उन्हें रोकने की जहमत न तो अभिभावकों ने और न ही विद्यालय प्रशासन ने। इतना ही नहीं रूल आफ द रोड के प्रति छात्रों को जागरूक करने के लिए भी किसी विद्यालय में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसके लिए पुलिस विभाग के साथ-साथ शिक्षा विभाग ने भी कोई आदेश विद्यालयों को जारी नहीं किया है।
मऊ जिले में इंटरमीडिएट स्तर के कुल 22 कान्वेंट स्कूल संचालित है। इसमें करीब एक हजार छात्र-छात्राएं हाईस्कूल और 12वीं की कक्षाओं में अध्ययनरत हैं। इसीक्रम में यूपी बोर्ड स्तर के कुल 508 विद्यालय है। अब बदलते जमाने की हवा इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को भी लग गई है। इसका परिणाम है कि शनिवार को पड़ताल करने पर पाया गया कि मऊ शहर के इर्दगिर्द मौजूद सभी कान्वेट विद्यालयों में हाईस्कूल की कक्षा में पढ़ने वाले छात्र भी बाइक से फर्राटा भरते हुए विद्यालय पहुंच रहें हैं। यह भी गनिमत है बिना हेलमेट के ये छात्र अपने दो अन्य साथियों को बाइक पर बिठाना नहीं भुले। ये छात्र बकायदे बाइक को विद्यालय के पार्किंग जोन में खड़ी करने के बाद शान से अंदर दाखिल हुए। इस संबंध में पूछे जाने पर विद्यालय में पता चला कि इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। यही नहीं छात्रों को बाइक राइडिंग के दौरान हेलमेट का प्रयोग करने या फिर यातायात के नियमों की जानकारी देने की भी कोई जहमत नहीं उठाई गई। इसका परिणाम है कि प्रबंधक और प्रधानाचार्य ने बताया कि उन्हे प्रशासन की तरफ से इस संबंध में कोई पत्र आदि जारी नहीं किया गया। नवंबर यातायात माह में यातायात विभाग की तरफ से विद्यालयों पर जागरुकता शिविर अवश्य लगाया गया। इसके बाद कोई जागरुकता का कार्यक्रम अयोजित नहीं किया जा सका। यह तो एक विद्यालय की बानगी थी, ऐसी स्थिति नगर क्षेत्र से लगे अन्य कई विद्यालयों में देखने को मिली।