संयुक्त किसान मोर्चा ने राज्यव्यापी आवाहन पर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण और मूल्य वृद्धि के खिलाफ मुख्यमंत्री को संबोधित नौ सूत्री मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा गया। इस दौरान बसंत कुमार ने कहा कि विधान सभा 2022 के चुनाव में जनता को बिजली मुफ्त देने, किसानों के ट्यूबेल के लिए फ्री बिजली देने, बकाया बिल माफ करने के वादे किए गए थे।
सत्ता में आई योगी सरकार अपने वादे से मुकर रही है। पहले से ही महंगी बिजली की मार झेल रहे उपभोक्ताओं पर एक और मूल्य वृद्धि का बोझ डाला जा रहा है। 19600 करोड़ रुपए का घाटा बढ़ा- चढ़ा कर दिखाया जा रहा है। जबकि 72000 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल सरकारी विभागों और बड़े-बड़े उपभोक्ताओं के ऊपर बकाये पड़े हैं। उन्हें वसूला जाना चाहिए। वहीं कैलाश चौहान ने कहा कि दक्षिणांचल और पूर्वांचल के निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए।
स्मार्ट मीटर लगाने, बिजली के रेट ईंधन से जोड़ने का फैसला सरकार वापस ले।साथ ही बिजली विभाग में रिक्त पड़े स्थान को भरने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन में अब्दुल अजीम खाँ, कैलाश चौहान, बसंत कुमार, राम नवल, वीरेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।