मरते साथी को पानी पिलाया था
बृजेश यादव ने युद्ध का एक वाकया बताते हुए कहा कि हमारा ग्रुप जुलाई में एक जगह जा हरा था। इस बीच ड्रोन हमला हुआ, इसमें आजमगढ़ निवासी दीपक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे हम लोगों ने पानी पिलाया, मगर अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। दीपक का शव भिजवाने के लिए हमने रूसी अधिकारियों से बातचीत की। मगर उन्होंने हमें चुप करा दिया।
सिंगापुर से पहले से संपर्क था एजेंट
बृजेश ने बताया कि उसका एजेंट से पहले से संपर्क था। पहले मलयेशिया भेजा गया। इसके बाद सिंगापुर भेजने के लिए रुपये लिए थे। मलयेशिया से लौटने पर वह बेरोजगार था, जहां एजेंट ने संपर्क कर उसे रूस जाने की बात कही, मना करने पर उसने कहा कि नौकरी सिक्योरिटी गार्ड की है, शुरुआत में 80 से 90 हजार रुपये मिलेंगे।
पहले से विश्वास होने के चलते वह उसकी बात में आ गया। वह मऊ के पांच युवाओं के साथ रूस में सिक्योरिटी गार्ड के लिए निकला। बताया कि एजेंट खुद अपने जीजा सहित सात लोगों के साथ पहले ही रूस चला गया था।
सुनील, श्याम सुंदर की हो चुकी है मौत
चंद्रापार निवासी सुनील यादव, कोईरियापार निवासी श्याम सुंदर और चंद्रापार निवासी विनोद के साथ दुबारी के बृजेश रूस गए थे। बृजेश ने बताया कि आजमगढ़ से कन्हैया, रामचंद्र, राकेश यादव, दीपक, धीरेंद्र, योगेंद्र, अजहरूदीन खान सहित दस लोग गए थे।
इसमें वह और आजमगढ़ निवासी राकेश यादव सुरक्षित आ गए है, जबकि मऊ जिला निवासी श्याम सुंदर और सुनील की मौत हो चुकी है। इस मामले में श्याम सुंदर, सुनील के परिजनों ने एजेंट विनोद पर आरोप लगाते हुए प्रशासन से गुहार लगाई कि वह मामले की जांच कराए।
अलग-अलग गन, ग्रेनेड चलाने का दिया गया प्रशिक्षण
बृजेश ने बताया कि रूस पहुंचने पर पहला सप्ताह सामान्य रहा। रोज परिवार से बातचीत कर रहे थे। लेकिन एक सप्ताह बाद ट्रेन से दूसरी जगह भेज दिया गया। साथ में एक रूसी सेना का अधिकारी भी मौजूद था, जो हमें एक प्रशिक्षण केंद्र पर ले गया, जहां पर हम लोगों अलग-अलग गन, ग्रेनेड चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहां पर हमारी कोई नहीं सुन रहा था।
प्रशिक्षण के बाद हमें चार-चार के ग्रुप में बांट कर युद्ध में उतार दिया गया। युद्ध में घोसी तहसील के चंदापार निवासी सुनील यादव की जान चली गई। बृजेश के अनुसार, सुनील, श्यामसुंदर और दो लोगों के ग्रुप को हमारे ग्रुप से दूर भेजा गया था, जहां सुनील और श्यामसुंदर की मौत की सूचना मिली। बताया कि मेरे ग्रुप का एक सदस्य बम के हमले में शहीद हो गया था।
इस दौरान मेरे बांये पैर में गोली लगी थी। इसके बाद वहां पर मेरा उपचार हुआ। इसी बीच एक स्थानीय अधिकारी को अपनी आपबीती बताई। इसका नतीजा यह हुआ कि उसने दूतावास से संपर्क हो सका। आरोप लगाया कि ठीक होने पर उसे दोबारा युद्ध क्षेत्र में भेजने की कोशिश की गई मगर दूतावास के दबाव के चलते स्वदेश भेज दिया गया।
बोले अधिकारी
मामला संज्ञान में नहीं हैं, लेकिन यह मामला बेहद गंभीर है, गौहरपुर निवासी युवक की मौत के बाद अगर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है तो पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कराएगी।
- इलामारन जी., एसपी मऊ