दोहरीघाट में घाघरा नदी में आई बाढ़ के बाद बढ़ा नदी का पानी।
दोहरीघाट।घाघरा का जल स्तर स्थिर रहने के बाद भी नदी के कहर बरपाने की आशंका से लोग दहशत में जी रहे हैं। इससे तटवर्ती इलाकों सहित कस्बे के धार्मिक धरोहरों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। कटान पीड़ितों की लाख गुहार के बाद भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं किया जा सका है।
घाघरा द्वारा प्रतिवर्ष तटवर्ती गांवों में कहर बरपाने के बाद भी नदी के जलस्तर स्थिर होने के बाद प्रशासन जहां राहत की सांस ले रहा है। वहीं घाघरा की लहरें मुक्तिधाम के शवदाह गृह,भारत माता मंदिर,खाकी बाबा की कुटी,डीह बाबा मंदिर पर दबाव बनाए हुए है। इससे नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम पर संकट के बादल मंडराने लगा है। वहीं तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग दहशत में जी रहे हैं। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो घाघरा का जलस्तर मंगलवार को 69.30 मीटर था।बुधवार को जलस्तर स्थिर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90मीटर आंका गया है। कटान पीड़ितों का कहना था कि जब-जब नदी घटती बढ़ती है तब तब कहर बरपाया है। कटान की आशंका से तटवर्ती गांवों के किसान धान की रोपाई कराने को लेकर उहापोह में हैं।