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बभनीकोल के कई घर समा सकते हैं नदी में

Sun, 05 Jun 2016 11:41 PM IST
BEARU, AMAR UJALA, MAU
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बाढ़ का खतरा
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जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर तमसा नदी के किनारे बसा बभनीकोल गांव गंभीर खतरे के मुहाने पर हैं। इस गांव के दर्जन भर घर तो ऐसे खतरे पर हैं, जहां बाढ़ आने पर कभी भी यह घर नदी की धारा में समा सकते हैं। इस गांव के पास नदी तीव्र मोड़ है। नदी की मुख्य धारा गांव के दर्जन भर घरों से महज तीन मीटर की दूरी पर है। नदी और घरों के बीच बस सीसीरोड का फासला भर है।  इस गांव के साथ ही पड़ोसी गांव उमापुर में भी नदी की कटान  बरसात होने पर होती है।
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 ग्राम पंचायत  सरवां के गांव बभनी कोल के  पास नदी में  कटान पिछले चार दशक से होती है। जिस वर्श नदी में पानी बढ़ता है तो कटान होने लगती है। अब हालत यह है कि गांव के पास की खेती योग्य भूमि नदी में समाती रही है।नदी की कटान से गांव वालों को बचाने के लिए तत्कालीन विधायक खैरुल बशर ने1979 में शासन में पहल की।   उनके प्रयास से नदी की धारा को मोड़ने के लिए दो ठोकर बनवाये गए। लेकिन ये नाकाफी रहे। इसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी के सदर विधान सभा विधायक कामरेड इम्तेयाज ने जनता के लगातार आवाज उठाने के बाद वर्ष 1991 में बभनी कोल के पास नदी में तीन ठोकर और बनवाये , लेकिन इसके बावजूद नदी की कटान पूरी तरह नहीं रुकी और बाढ़ आने पर गांव के पास   कटान होती रहती है। 
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अब हालत यह है कि नदी की धारा गांव के निवासी  मुसाफिर यादव ,रामरूप यादव , कल्पनाथ यादव ,  साधू यादव , पबारू यादव , श्यामदत्त  तथा मुस्लिम नटों  में सिरताज , महाजन , रहीम , भोला , इम्तेयाज  और ठाकुर  के घरों के बिलकुल करीब आ गई है। इसके अतिरिक्त तमसा  नदी  उमापुर में  मानिक चंद धोबी , प्रेमचंद धोबी तथा गुलाब चंद धोबी ,सूर्यभान पांडेय तथा पारस नाथ तिवारी   के घरों के करीब तक आ गई हैं। पिछले चार दशकों में नदी गांव के पास डेढ़ सौ मीटर भूमि की कटान कर चुकी है। इनके अतिरिक्त रणवीरपुर में कमोबेश यही स्थित है।   गनीमत यही है कि इधर पिछले कई सालों से तमसा में बाढ़ नहीं आई अन्यथा स्थिति काफी भयावह होती। उमापुर गांव के पूर्व प्रधान विनोद तिवारी , साधू सिंह,  छोटक राजभर , जगदीश मल्लाह कहते हैं कि गांव में हो रही कटान रोकने के लिए दर्जनों बार प्रार्थनापत्र दिए गए। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई ठोस योजना नहीं बनाई। इन लोगों का कहना है कि कटान रोकने के लिए नदी की धारा को मोड़ने के लिए अभी दो और ठोकर बनाने की जरूरत है।  
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