मऊ। त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनावों के लिए हुए आरक्षण ने प्रधान से लेकर प्रमुख पद पर दावेदारी करने वाले कई लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ऐसे दावेदार लंबे समय से तैयारियों में जुटे थे। जो लोग प्रमुख के लिए अपना सारा जोर लगा रखे थे, उनकी बीडीसी की सीट ही दूसरी जाति के लिए आरक्षित हो गई। आस पास की सीट भी ऐसी नहीं बची है जिस पर प्रमुख के दावेदार बीडीसी का चुनाव लड़ सकें। ऐसे अब अब ऐसे लोग किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। अब ऐसे लोग अब अपने खास आदमियों की तलाश में जुट गए हैं। जिसे चुनाव लड़ाया जा सके। यही हाल जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए भी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण तो शासन की ओर से महिला के लिए सुरक्षित कर दिया गया है। लेकिन यहां कुछ ताकतवर दावेदारों की जिला पंचायत सदस्य पद के लिए जमीन तैयार की गई अपनी परंपरागत सीट ही दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। उनके समक्ष अब आस पास की सीट भी नहीं हैं जिस पर जिला पंचायत सदस्य के लिए चुनाव लडा सकें। जानाकरों का कहना है कि वैसे राजनीतिक खिलाड़ी इतनी जल्दी हार मानने वाले भी नहीं हैं। ऐसे लोग अब अपने खास आदमियों से अपनी सीट छोड़ने के लिए मनाने की जुगत में लग गए हैं। वैसे जिला पंचायत के दो सशक्त दावेदारों में से एक के समक्ष तो अब कठिन चुनौती आ गई है। कई दावेदार अभी भी आशावान हैं। हालांकि अभी आपत्ति के लिए चार दिन और शेष हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रमुुखी पद के दावेदारों को उम्मीद है कि शायद आपत्ति करने से आरक्षण की स्थिति बदले और उनके मनसूबे कामयाब हो सकें। वैसे जानकारों का मानना है कि जिस पारदर्शी तरीके आरक्षण किया गया है। उसमें बदलाव की गुंजाईश काफी कम दिख रही है। क्योंकि आरक्षण सूची में अपने मनमाफिक बदलाव के लिए रसूखदारों की ओर से काफी जोर आजमाईश की गई थी। लेकिन किसी की चल नहीं पाई। विकास भवन और ब्लाक मुख्यालयों पर कुछ ऐसी ही चर्चा सुनने को मिली। इस बाबत डीपीआरओ घनश्याम सागर का कहना है कि गाइड लाइन के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ आरक्षण सूची जारी की गई है। वैसे आठ मार्च तक आपत्ति ली जाएंगी। उनका निपटारा करके 15 मार्च तक अंतिम सूची जारी की जाएगी।
इनसेट:
पहले दिन आईं 50 आपत्तियां:
मऊ।आपत्ति लेने के पहले दिन बृहस्पतिवार को 50 आपत्तियां डीपीआरओ कार्यालय में प्रस्तुुत की गईं। ये सभी आपत्तियां आरक्षण को लेकर हैं। ये आपत्तियां आठ मार्च तक ली जाएंगी