जिला अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों के उपचार में लापरवाही को लेकर जमकर हंगामा हुआ। नगर के रोज गार्डन स्थित रामनगर कॉलोनी निवासी दंपति सौरभ पांडेय और सपना पांडेय ने बताया कि दो दिन पहले दोनों मार्ग दुर्घटना में घायल हो गए थे। उसी दिन जब जिला अस्पताल लाया गया तो स्ट्रेचर नहीं होने के कारण एंबुलेंस के बिना स्टैंड वाले स्ट्रेचर से वार्ड में लाया गया।
शुक्रवार को मेडिकल के लिए बुलाया गया, जहां दो घंटे के इंतजार के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिला और चिकित्सक ने दूसरे दिन आने के लिए कह दिया। इसके बाद एंबुलेंस में बैठे दंपती नाराज हो गए। उनका आरोप है कि स्ट्रेचर नहीं होने का बहाना बनाया गया और बाद में अस्पताल बंद होने का हवाला देकर दूसरे दिन आने को कहा गया। उन्होंने बताया कि पहले दिन जब वे आए थे, तब स्ट्रेचर पूरी तरह बदहाल था। अस्पताल में व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं है। एक तीमारदार ने बताया कि एक चिकित्सक ने परामर्श के बाद 1250 रुपये की दवा बाहर से लिख दी।
जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीज सीधे चिकित्सक के कक्ष में पहुंच जाते हैं, जबकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर की आवश्यकता होती है। इमरजेंसी से ट्रामा सेंटर की दूरी करीब 200 मीटर है। आपात स्थिति में मरीजों को वहां ले जाने में दिक्कत होती है और अक्सर स्ट्रेचर वहीं छोड़ दिए जाते हैं। इसी प्रकार, किसी की मृत्यु होने पर मेडिकल परीक्षण के लिए शव को पीएम हाउस ले जाना होता है, जो इमरजेंसी से करीब 300 मीटर दूर है। स्ट्रेचर की कमी के कारण मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।