फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लापरवाही की हद: किशोर ने सीने का कराया था एक्सरे, दे दी गई पैर की रिपोर्ट; डॉक्टर के भी उड़े होश

Sat, 25 Apr 2026 10:59 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।

सार

Mau News: मऊ जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिला अस्पताल के एक्सरे अनुभाग में एक किशोर ने सीने का एक्सरे कराया था, लेकिन उसे पैर की रिपोर्ट दे दी गई।  
विज्ञापन
एक्सरे की खाली फिल्म - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मऊ जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक्सरे अनुभाग में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया। सीने में दर्द के बाद देवलास गांव से उपचार के लिए आए रामकृपाल यादव (14) का एक्सरे करने के बाद उन्हें पैर की रिपोर्ट दे दी गई। अपनी मां के साथ आया किशोर जब रिपोर्ट लेकर चिकित्सक के पास पहुंचा तो चिकित्सक के भी होश उड़ गए।
विज्ञापन


चिकित्सक ने उसे दोबारा एक्सरे कराने के लिए कहा। इसके बाद वह किशोर अपनी मां के साथ फिर पहुंचा। मामला उजागर होने पर वहां लोगों की भीड़ लग गई, जिसके बाद आनन-फानन में दोबारा एक्सरे किया गया। कुछ मरीजों के साथ आए तीमारदारों ने बताया कि जांच के बाद उन्हें जो फिल्म दी गई, वह पूरी तरह खाली थी।

क्या बोले डॉक्टर
गलत एक्सरे जांच रिपोर्ट के बारे में उन्हें जानकारी हुई है। उसकी जांच कराई जा रही है। जिला अस्पताल में कुल आठ स्ट्रेचर से काम चल रहा है। चार स्टॉक में हैं और चार का ऑर्डर दिया गया है। सड़कों की खराब स्थिति के कारण स्ट्रेचर के पहिए अक्सर टूट जाते हैं। विभिन्न अनुभागों की दूरी भी समस्या है। स्ट्रेचर का उपयोग सीटी स्कैन, एक्सरे, ट्रामा विंग, इमरजेंसी के दोनों तल और ओपीडी में किया जाता है। -डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
विज्ञापन

स्ट्रेचर नहीं मिलने पर घायल दंपती का हंगामा

जिला अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों के उपचार में लापरवाही को लेकर जमकर हंगामा हुआ। नगर के रोज गार्डन स्थित रामनगर कॉलोनी निवासी दंपति सौरभ पांडेय और सपना पांडेय ने बताया कि दो दिन पहले दोनों मार्ग दुर्घटना में घायल हो गए थे। उसी दिन जब जिला अस्पताल लाया गया तो स्ट्रेचर नहीं होने के कारण एंबुलेंस के बिना स्टैंड वाले स्ट्रेचर से वार्ड में लाया गया।

शुक्रवार को मेडिकल के लिए बुलाया गया, जहां दो घंटे के इंतजार के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिला और चिकित्सक ने दूसरे दिन आने के लिए कह दिया। इसके बाद एंबुलेंस में बैठे दंपती नाराज हो गए। उनका आरोप है कि स्ट्रेचर नहीं होने का बहाना बनाया गया और बाद में अस्पताल बंद होने का हवाला देकर दूसरे दिन आने को कहा गया। उन्होंने बताया कि पहले दिन जब वे आए थे, तब स्ट्रेचर पूरी तरह बदहाल था। अस्पताल में व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं है। एक तीमारदार ने बताया कि एक चिकित्सक ने परामर्श के बाद 1250 रुपये की दवा बाहर से लिख दी।
विज्ञापन

इमरजेंसी से ट्रॉमा सेंटर की दूरी और खराब सड़क से परेशानी

जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीज सीधे चिकित्सक के कक्ष में पहुंच जाते हैं, जबकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर की आवश्यकता होती है। इमरजेंसी से ट्रामा सेंटर की दूरी करीब 200 मीटर है। आपात स्थिति में मरीजों को वहां ले जाने में दिक्कत होती है और अक्सर स्ट्रेचर वहीं छोड़ दिए जाते हैं। इसी प्रकार, किसी की मृत्यु होने पर मेडिकल परीक्षण के लिए शव को पीएम हाउस ले जाना होता है, जो इमरजेंसी से करीब 300 मीटर दूर है। स्ट्रेचर की कमी के कारण मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें