जालसाजी के मामले में दोषी परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख रमेश सिंह काका ने शुक्रवार की सुबह साढ़े नौ बजे सीजेएम कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया।
सीजेएम डॉ. कृष्णाप्रताप सिंह ने न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जालसाजी में उसे चार साल की कैद सजा सुनाई और 14 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
अर्थदंड न देने पर उसे दो माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वह दोषी करार होने के बाद पांच दिन से फरार था। रमेश सिंह काका के सहयोगी जावेद आजमी को जालसाजी के मामले में सीजेएम कोर्ट बीते दो जून को ही चार वर्ष की सजा सुना चुकी है। 24 घंटे पहले ही पुलिस ने रमेश सिंह काका पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
अभियोजन के अनुसार रमेश सिंह काका पर जालसाजी के आरोप में 9 जून 2010 को सहादतनपुरा निवासी सूर्यनाथ यादव ने मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि वादी के रिश्तेदार भानु प्रताप निवासी कोटिया, मठिया थाना मुहम्मदाबाद गोहना वर्षों से मुंबई में रहकर नौकरी करते थे। 9 जून 2010 को उसे पता चला है कि उसके रिश्तेदार भानु प्रताप की रिवाॅल्वर का लाइसेंस आईडी लगाकर प्रार्थना पत्र पर फर्जी फोटो लगाकर बदमाशों ने सिम प्राप्त कर लिया है और दुरुपयोग किया जा रहा है।
उसे पता चला कि पीसीओ संचालक ने सिम कार्ड एक अजनबी व्यक्ति को प्रार्थी के रिश्तेदार भानु प्रताप के नाम से बेचा है जिस पर रिवाॅल्वर लाइसेंस के फोटो में काफी भिन्नता है। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्जकर बाद विवेचना सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कैथवली गांव निवासी परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लाक प्रमुख रमेश सिंह काका और जावेद आजमी के विरुद्ध आरोप पत्र सीजेएम न्यायालय में भेजा।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए अभियोजन अधिकारी हरेंद्र सिंह ने 7 गवाह पेश किए।
सीजेएम ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सोमवार को रमेश सिंह काका और जावेद आजमी को दोषी पाया था। इस दौरान कोर्ट में उपस्थित न होने पर सीजेएम ने रमेश सिंह के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी किया था। सीजेएम कोर्ट ने एक जून को 15 साल पुराने जालसाजी के प्रकरण में रमेश सिंह काका और उसके सहयोगी जावेद काजमी को दोषी करार दिया था।
दो जून को फैसला के समय मुख्य आरोपी फरार हो गया। उस दिन केवल जावेद आजमी को चार वर्ष की सजा हुई थी। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस रमेश सिंह काका को गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दे रही थी।