लगभग एक महीने की धूप और तपिश के बाद शुक्रवार को प्री मानसून की दस्तक ने लोगों को राहत पहुंचाई। सुबह से ही आसमान में छाए बादल और तेज हवा ने अपना असर दिखाया। अपराह्न बाद थोड़ी देर के लिए हुई बारिश ने सूरज की आग को ठंडा कर दिया।
45 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका तापमान बारिश से गिरकर 33 डिग्री पहुंच गया। बारिश की बूंदों से निकली सोंधी खुशबू ने लोगों को घर के बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। बच्चों ने जहां इस बारिश का मजा लिया, वहीं बड़ों ने राहत की सांस ली।
जनपद में हफ्तों से भीषण गर्मी व लू का प्रकोप जारी रहने से लोग परेशान थे। अघोषित बिजली कटौती ने लोगों को एक-एक पल जीना मुश्किल किया था। ऊपर से बढ़ते पारे ने सड़कों सुनसान कर दिया। ऐसे में शुक्रवार को मौसम ने करवट बदली। अपराह्न बाद आसमान में बादल छा गए। शाम को लगभग सवा छह बजे से साढ़े छह बजे तक नगर में हल्की बारिश की फुहारों से सबकुछ नहा गया।
लोग बरबस ही कह उठे ‘अब गर्मी से निजात मिलेगी’। बारिश के दौरान सड़क, जमीन से भाप निकलती दिखी। इससे पहले गुरुवार को तापमान 47 डिग्री तक पहुंच गया था। लेकिन शुक्रवार को मौसम में आए बदलाव से तापमान में दस डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज होने से लोगों को राहत मिली। हालांकि बारिश बंद होते ही उमस शुरू हो जाने से लोग फिर बेहाल हुए। उधर आषाढ़ माह में नौ दिन बाद भी झमाझम बारिश न होने से किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है।
अधिकांश किसान धान की नर्सरी के लिए खेतों को तैयार नहीं कर पाए हैं। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से धान की नर्सरी लगाई भी है, तो सिंचाई के अभाव मेें सूखने के कगार पर है। किसान झमाझम बारिश के लिए आसमान की ओर निहार रहे हैं।
पिपरीडीह क्षेत्र के रामसरीख यादव, सत्यराम सिंह, गणेश शर्मा, मनिराम सिंह का कहना है कि मौसम अनुकूल न होने के चलते धान की नर्सरी को बचाना मुश्किल हो रहा है। इसी बीच बिजली कटौती से समय से धान के नर्सरी की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे नर्सरी पर असर पड़ रहा है। पर्याप्त विद्युत आपूर्ति किए जाने की मांग की।