जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से शुक्रवार को तहसील सदर में विश्व बाल श्रम दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने बाल श्रम का कारण गरीबी और अशिक्षा को बताया। साथ ही इस सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए आम लोगों को जागरूक करने पर बल दिया गया।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए अपर जिला जज धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि 21वीं सदी चल रही है, लेकिन अब भी समाज में कुछ बुराइयां विद्यमान हैं। दहेज प्रथा, बाल श्रम, भिक्षाटन सामाजिक बुराई व कानूनी अपराध है।
कहा कि बाल श्रम का मुख्य कारण गरीबी और अशिक्षा है। इसके चलते लोग अपने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को होटलों व ढाबों पर कार्य करने के लिए भेज देते है। ंबाल श्रम को दूर करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्रसंघ ने वर्ष 2002 में बालश्रम दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया। ताकि इस सामाजिक बुराई को दूर किया जा सके। कहा कि बच्चे राष्ट्र के भविष्य हैं। संविधान में उनको भी जीने के लिए मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है।
राज्य की जिम्मेदारी है कि बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करे। इसके लिए हम लोगों को भी जागरूक होना होगा। प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रमोद कुमार सिंह ने प्राधिकरण की ओर से दी जाने वाली सुविधाआें के बाबत जानकारी देते हुए बताया कि गरीबी से निजात दिलाने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी है।
जब लोग शिक्षा के महत्व को समझेंगे तभी बालश्रम दूर होगा। गरीबी ही बालश्रम की वजह है। अंत में उन्हाेंने ने आगामी 28 जून को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण करने पर बल दिया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवींद्र कुमार ने कहा कि संविधान में मौलिक अधिकार व राज्याें को इस बात की जिम्मेदारी दी गई है कि वह छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करें। तहसीलदार सादर श्रीप्रकाश गुप्ता ने कहा कि गरीब के बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ता है, इसकी मुख्य वजह अज्ञानता है।
उन्होंने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शिक्षित करने के लिए लोगों को जातपात से ऊपर उठकर कार्य करने की सलाह दी। अनिल कुमार मिश्र के संचालन में श्रमविभाग के टीजे सिंह, विजेंद्र सिंह, अजय कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, धनंजय पांडेय मौजूद रहे।