जिले की 34 किमी लंबी छह सड़कों के नवीनीकरण में पंचायतीराज विभाग द्वारा इकट्ठा किए गए प्लास्टिक का प्रयोग नहीं हो पाया है। साइज बड़ी होने से लोक निर्माण विभाग ने प्लास्टिक खरीदने से मना कर दिया और आगरा से मंगाई गई प्लास्टिक का उपयोग करके सड़क नवीनीकरण में लगाया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतीराज विभाग द्वारा गांवों से प्लास्टिक इकठ्ठा करके सिधाअहिलासपुर और काझा स्थित प्लास्टिक वेस्ट यूनिट पर 25 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक रखा गया है। इसे रिसाइकल करके लोक निर्माण विभाग द्वारा खरीदने की योजना थी, जिससे सड़क बनाना था।
इससे गांवों से कचरा भी साफ होता और ग्राम पंचायतों की आमदनी भी बढ़ती। लेकिन पंचायतीराज विभाग की ये मंशा फेल हो गई। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 34 किलोमीटर लंबी छह सड़कों का नवीनीकरण तो हुआ, पंचायतीराज विभाग की प्लास्टिक नहीं खरीदी गई।
कटिंग की साइज बड़ी बताकर उसे रिजेक्ट कर दिया गया। पांच माह पहले इस प्लास्टिक का सैंपल गया था, जिसे फेल कर दिया गया। सड़क बनाने के लिए आगरा से 40 टन प्लास्टिक खरीदी गई है। पीएमजीएसवाई का कहना है कि डामर में गलाने के लिए 0.2 से 0.6 एमएम जितनी पतली प्लास्टिक की कटिंग चाहिए थी, जो भूसा की तरह हो।
लेकिन जिले के प्लास्टिक वेस्ट यूनिट पर लगी मशीन 10 एमएम बड़ा दाना काटती है। मानक के अनुसार एक किमी लंबी सड़क में 1.15 टन प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। इस तरह 34 किमी लंबाई में 40 टन प्लास्टिक लगा है। अब पंचायतीराज विभाग प्राइवेट कंपनियों से बातचीत कर प्लास्टिक बेचने में जुटा है। इसके लिए एक कंपनी को सैंपल भी भेज दिया गया है, वहां से मंजूरी मिलने पर रेट तय होगा।
प्लास्टिक से बनी हैं ये सड़कें
1. सियरही से बर्जला 7.7 किमी
2. टेघना से भीरा 7.6 किमी
3. कोपागंज से नौसेमर 4 किमी
4. सिपाह से सउनी 6 किमी
5. माऊरबोझ से हाजीपुर 5.1 किमी
6 फतेहपुर से चंद्रापार 4.3 किमी
पांच माह पहले पीएमजीएसवाई द्वारा प्लास्टिक के दानों का सैंपल लिया गया था। लेकिन उनके मानक के अनुसार 0.2 से 0.6 एमएम प्लास्टिक चाहिए था। प्लास्टिक वेस्ट यूनिट में इतना बारिक कटिंग करने वाली मशीन नहीं लगी है। - किरन वर्मा, सहायक पंचायतीराज अधिकारी, मऊ
पंचायतीराज विभाग द्वारा मानक के अनुसार प्लास्टिक उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जिसके चलते आगरा से खरीदना पड़ा है। 34 किमी लंबी छह सड़कों के नवीनीकरण के लिए 40 टन प्लास्टिक की आवश्यकता थी। - प्रदीप कटियार, सहायक अभियंता, पीएमजीएसवाई मऊ