मऊ। खेल विभाग की तरफ से जागरुकता अभियान चलाने के बाद भी जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हाॅकी को छोड़कर अन्य खेलों में बालिकाओं की भागीदारी 35 प्रतिशत से भी कम है। वाॅलीबाॅल और कुश्ती में बालिकाओं की उपस्थिति शून्य है। दो खेलों के कोच का पद रिक्त हैं। स्टेडियम में खेल सुविधाओं का अभाव है। स्टेडियम में 598.06 लाख की लागत से हाॅकी एस्टोटर्फ, सिंथेटिक ट्रैक आदि का निर्माण मार्च में पूरा करना था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। विभाग का दावा है कि खेलों में भाग लेने में बालिकाओं का रुझान बढ़ रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हाॅकी, हैंडबाल, वॉलीबाल, एथलेटिक्स, फुटबाॅल, जिम्नास्टिक, कबड्डी, कुश्ती, क्रिकेट, बास्केटबाल, बैडमिंटन खेल में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन लंबे समय से बास्केटबाल, बैडमिंटन का कोच का पद रिक्त है।
स्टेडियम में मात्र 295 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। हाॅकी में 15 बालक, 15 बालिकाओं ने पंजीकरण कराया है। हैंडबाल में पंजीकृत 30 खिलाड़ियों में नौ लड़कियां पंजीकृत हैं। वाॅलीबाॅल में 40 पंजीकृत खिलाड़ी हैं, बालिकाओं का पंजीकरण शून्य है।
एथलेटिक्स में 40 पंजीकृत खिलाड़ियों में 15 बालिकाएं हैं। फुटबाॅल में 40 पंजीकृत खिलाड़ियों में 10 बालिकाएं हैं। जिम्नास्टिक में 20 पंजीकृत खिलाड़ियों मेें आठ बालिकाएं हैं। कबड्डी में पंजीकृत खिलाड़ियों में मात्र चार बालिकाएं हैं। कुश्ती में पंजीकृत 30 खिलाड़ी हैं। जिसमें बालिकाओं की संख्या शून्य है। स्टेडियम में खेल सुविधाओं का अभाव है।
स्टेडियम में 598.06 लाख की लागत से हाॅकी एस्टोटर्फ, सिंथेटिक ट्रैक का हैंडओवर शीघ्र हो जाएगा। खेलों में भाग लेने के लिए बालिकाओं का रुझान बढ़ रहा है। रिक्त चल रहे कोच के पद को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। - डीपी सिंह, क्रीड़ा अधिकारी