नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों के लिए चलेगा उपचारात्मक शिक्षण मॉक टेस्ट के जरिए किया जाएगा कमजोर विद्यार्थियों का चयन संवाद न्यूज एजेंसी मऊ। जिले के नौवीं और 11वीं कक्षा के कमजोर छात्र-छात्राओं को उपचारात्मक शिक्षण कार्य से जोड़ा जाएगा। इसके तहत ऐसे विद्यार्थियों को चिह्नित किया जाएगा, जिनकी पढ़ने-लिखने और विषयों को समझने की क्षमता कमजोर है।
25 प्रतिशत पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए अलग से अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। जिले में 17 राजकीय और 67 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे नौवीं और 11वीं कक्षा के कमजोर छात्र-छात्राओं को अन्य विद्यार्थियों के बराबर लाने की कवायद तेजी से चल रही है। इसके लिए विद्यालयों में उपचारात्मक कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
विद्यालयों में उपचारात्मक शिक्षण करने से पूर्व विषयवार शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षकों का प्रशिक्षण सत्र पूरा होने के बाद शिक्षक पढ़ाई में कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए अतिरिक्त उपचारात्मक कक्षाओं का संचालन करेंगे। 11वीं कक्षा के लिए अंग्रेजी, गणित, रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान और भौतिक विज्ञान की पढ़ाई उपचारात्मक कक्षाओं में कराई जाएगी। 9वीं कक्षा के लिए अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और हिंदी की उपचारात्मक कक्षाएं चलाई जाएंगी।
उपचारात्मक कक्षाओं में किन विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा, इसका निर्धारण मॉक टेस्ट के जरिए किया जाएगा। यह टेस्ट कक्षा नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों के लिए होगा। टेस्ट में सभी विषयों से जुड़े प्रश्न होंगे और प्रश्न पत्र समग्र शिक्षा विभाग की तरफ से जारी किया जाएगा। यह टेस्ट 100 अंक का होगा। 25 से कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को उपचारात्मक कक्षा में शामिल किया जाएगा।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि 25 प्रतिशत पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए अलग से अतिरिक्त कक्षाओं के संचालन के मामले में समस्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर दिया गया है।