मऊ। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने घोसी ब्लॉक के इटौरा डोरीपुर ग्राम पंचायत के प्रधान अनुपमा देवी के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दिया है। प्रधान पर विकास कार्यों में 7 लाख 95 हजार 961 रुपये के सरकारी धन के गबन की पुष्टि प्रारंभिक जांच में हुई है। गांव के नीतीश राजभर की शिकायती पत्र पर डीएम प्रवीण मिश्रा की ओर से 4 फरवरी को जांच के आदेश दिए गए थे। इसके पूर्व इटौरा डोरीपुर गांव के शिकायतकर्ता रीतेश राजभर की शिकायत पर तत्कालीन डीएम अरुण कुमार ने नवंबर 2023 को जांच समिति का गठन कर रिपोर्ट 15 दिन में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। बीते साल 17 नवंबर को जांच टीम गांव में पहुंची तो कोई भी अभिलेख जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। बाद में जांच समिति ने नौ बिंदुओं से संबंधित विकास कार्यों की अभिलेखीय और स्थलीय जांच की। जिसमें ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने गांव में कई विकास कार्यों के नाम पर बिना कोटेशन और गांव में खुली बैठक के ही साधना ट्रेडर्स मूंग मास और भावनपुर की संस्था को डेस्क बेंच और ह्यूम पाइप आदि का भुगतान कर दिया। नौ बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट में समिति ने 7 लाख 95 हजार 961 रुपये का गबन का आरोप ग्राम प्रधान अनुपमा देवी और सेक्रेटरी पर लगाते हुए जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दिया। रितेश राजभर ने कहा कि परिजनों को ग्राम प्रधान से लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
कोट
इटौरा डोरीपुर की ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दिया है। त्रिस्तरीय कमेटी के संचालन के लिए ग्राम पंचायत के सदस्यों की सूची मंगाई जा रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में गबन की धनराशि की वसूल करने की कार्रवाई की जाएगी।
- विशाल सिंह, जिला पंचायत राजअधिकारी