प्रबोधिनी एकादशी पर्व सोमवार को नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने व्रत रखा। साथ ही गन्ने को रखकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। वहीं दूसरी तरफ नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर अखंड रामायण का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने तमसा, घाघरा में डुबकी भी लगाया।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को प्रबोधिनी एकादशी पर्व के अवसर पर नगर के हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट और रामघाट ब्रह्मस्थान पोखरा, शीतला माता धाम स्थित पोखरा तथा नागा बाबा की कुटी, दोहरीघाट के सरयू तट के विभिन्न घाटों पर तड़के ही श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
इसके बाद मंदिरों में मत्था टेका। साथ ही व्रत रखकर गन्ने की विधि विधान से पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि एकादशी के दिन श्री हरि योग निदरा से जागते है। एकादशी का व्रत रखने से परिवार में सुख, शांति तथा ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। पर्व के अवसर पर नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में अखंड रामायण पाठ सहित विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रमुख बाजारों सहित चट्टी चौराहों पर गंजी, सिंघाड़े की बिक्री खूब रही।
दोहरीघाट : कस्बा सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में प्रबोधिनी एकादशी का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर सरयू नदी तट के विभिन्न घाटों पर भोर से ही स्नान करने का क्रम चलता रहा। गन्ने का विधि विधान से पूजन अर्चन करने के बाद नए गुड़ भेली का नेवान कर बुजुर्गो का आशीर्वाद लिया।
पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के कहिनौर, उस्मानपुर, महलीपुर, सुअराबोझ, रैकवारडीह सहित विभिन्न इलाकों में प्रबोधिनी एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
शालिग्राम संग ब्याही गई तुलसी माता
बढुआगोदाम। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में प्रबोधिनी एकादशी पर गन्ने के मंडप के बीच देवी तुलसी विवाह संपन्न कराया गया। शकरकंद, सिंघाड़ा, सुहाग की सामग्रियां चढ़ा कर लोगों ने विधि विधान से पूजा की। चावल के ऐपन से आंगन के बीच में तुलसी जी के चरण बनाए गए।
गन्ने के मंडप के बीच तुलसी का पौधा और शालिग्राम भगवान की तस्वीर रखी गई। विधि विधान से लोगों ने पूजा कर तुलसी विवाह की रस्में पूरी की। कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी जी की विदाई की जाएगी।
इस संबंध में पं. विरेंद्र शुक्ल ने बताया कि प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी विवाह के साथ ही जन सामान्य के लिए पाणिग्रहण संस्कार का रास्ता खुल गया। प्रबोधिनी एकादशी के दिन संसार के पालनकर्ता भगवान विष्णु मोह निद्रा का त्याग कर जागृत अवस्था में होते हैं।