नगर के ब्रह्मस्थान स्थित पोखरे में जमी काई।संवाद
मऊ। शहर की धरोहर और सुंदरता का प्रतीक कहे जाने वाले ऐतिहासिक पोखरे और सरोवर आज उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। नगर स्थित प्रसिद्ध झील महल सरोवर और ब्रह्मस्थान पोखरा में हरी काई की परत जम गई है। नगर के ब्रह्मस्थान स्थित पोखरा काफी समय पुराना है। लाखों की लागत से यहां पर दसकों पूर्व धार्मिक पोखरे का जीर्णोंद्धार कराया गया। यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का आवागमन होता है। इसके बावजूद जहां एक तरफ पोखरे का पानी सड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ यहां पर काई जमी हुई है।
वहीं कलेक्ट्रेट के पास बने झील महल सरोवर का सुंदरीकरण कुछ वर्ष पूर्व 50 लाख रुपए से कराया गया। सुंदरीकरण के समय यहां पर कई तरह की बातें हुई कि सरोवर में बोटिंग होगा। बाजार हाॅट लगाकर इसको पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। लेकिन विकास तो दूर यहां पर भी सरोवर की सीढि़यों से लेकर सरोवर में काई और जलकुंभी जमी हुई है। शहर के लोगों के लिए सुबह-शाम टहलने और शांति के पल बिताने का यह प्रमुख केंद्र है।
हम प्रतिदिन झील महल सरोवर के पास व्यायाम करते हैं। लंबे समय से सरोवर सफाई नहीं कराई गई है। काई जमने और पानी सड़ने के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है। रामकृष्ण सिंह-ताजोपुर
हमारा ग्रुप झील महल सरोवर के पास सुबह टलने आता है। लेकिन पानी की सड़न से कई दिनों से हमलोग परेशान हैं। यहां पर नगर पालिका को तत्काल प्रभाव से सक्शन मशीन और श्रमिकों के जरिए काई व गंदगी हटाने का काम शुरू करना चाहिए। पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए फव्वारे लगाने चाहिए, ताकि काई दोबारा न जमे। - पीयूष सिंह विसेन- गाजीपुर तिराहा
नगर पालिका द्वारा नियमित रूप से सरोवरों की सफाई कराई जाती है। आज ही हमने ब्रह्मस्थान पोखरे में सफाई कराकर सभी कचरों को बाहर निकलवाया है। वहीं बारिश बाद झील महल सरोवर की भी सफाई की जाएगी। यहां पर काई और जलकुंभी की भी सफाई पतली जाली और मशीनों से कराना है। - डा. मणिभूषण तिवारी - अधिशासी अधिकारी- नगर पालिका परिषद मऊ