क तरफ जहां देह झुलसा देने वाली भीषण गर्मी से लोगों का जनजीवन बेहाल है। लू के थपेड़ों से पेड़ पौधे तो छोड़िए मनुष्य मुरझा रहा है, ऐसे वातावरण में वन विभाग नए पौधे लगा रहा है। ये पौधे मऊ से कोपागंज की ओर जाने वाले हाइवे और मऊ से बलिया जाने वाले स्टेट हाइवे के किनारे लगाए जा रहे हैं। इन दिनों वन विभाग की ओर से पौधे लगाने, ईंटों का सुरक्षा घेरा बनाने का काम जोरों पर चल रहा है। इस भीषण गर्मी वाले मौसम में वन विभाग की यह कवायद लोगों के गले नहीं उतर रही है।
सामान्य तौर पर पौधरोपण का अनुकूल समय जुलाई अगस्त माना जाता है। उस समय बरसात का मौसम होने के चलते वातावरण में नमी होती है। जुलाई से लेकर सितंबर तक लगाए जाने वाले पौधों में सामान्यतया आधे से अधिक पौधे बच नहीं पाते हैं तो वर्तमान समय में जब भीषण गर्मी पड़ रही है तो कितने पौधे बचेंगे, लोगों के मन में सहज प्रश्न उठ रहा है। विभाग पौधे तो लगवा ही रहा है उसके पहले ईंटों का सुरक्षा घेरा भी बनाया जा रहा है।
पौधे लगाने के दो चार दिनों तक तो वन विभाग के टैंकरों से पौधों को पानी भी दिया गया। लेकिन गर्मी के चलते पानी की यह नमी महज घंटे दो घंटे में ही समाप्त हो जा रही है। सारे पौधे सूख भी गए हैं। इस बाबत अधिवक्ता शिवनारायण राय कहते हैं कि प्रतिकूल मौसम में वन विभाग को पौधे लगाने की क्यों सूझी। भीषण गर्मी में पौधे लगाने की कवायद जनता के धन की बरबादी है। किसान नेता देवप्रकाश राय सवाल उठाते हैं कि जब बरसात के दिनों में विभाग द्वारा लगाए गए पौधों में से आधे से ज्यादा सूख जाते हैं तो भला इस मौसम में पौधे लगाने का क्या औचित्य है।
कुछ ऐसे ही सवाल भूगोलविद सेवानिवृत्त प्रवक्ता रामतीर्थ यादव,समाजसेवी बागी राय, शिक्षक प्रमोद यादव , किसान नेता राम नवल राही और प्राध्यापक डा. सुशील सिंह यादव उठाते हैं। इन लोगों ने बेमौसम कराए जा रहे इस पौधरोपण की जांच कराने की मांग किया है।