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सनेगपुर के लोगों ने किया मतदान बहिष्कार

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कोपागंज के सनेगपुर गांव में रोड के लिए प्रदर्शन करते ग्रामीण। - फोटो : mau
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चार हजार आबादी और 1377 मतदाताओं वाले परदहा ब्लाक के सनेगपुर गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन के दबाव के बावजूद मतदान का बहिष्कार किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार गांव वालों को वोट करने के लिए समझाया लेकिन वे अधिकारियों के दबाव में नहीं आए। अंत में अधिकारियों ने गांव के चौकीदार ,आशाओ ,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाकर मतदान कराया लेकिन गांव के अन्य लोगों ने मतदान नहीं किया। ग्राम प्रधान पर जांच कर कार्रवाई करने की धमकी देते रहे लेकिन गांव वाले के दृढ़ संकल्प के आगे अधिकारी बेबस नजर आए।
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 बताते चलें कि सनेगपुर गांव में आने जाने के लिए एनएचएआई द्वारा फोरलेन पर ढाले का निर्माण किया गया था। एनएचएआई द्वारा तीन महीने पहले उस ढाले को तोड़ दिया गया, जिसके कारण गांव वालों को कोपागंज और सहरोज के रास्ते दस किलोमीटर घूम कर जिला मुख्यालय आना पड़ता है। इसे लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है। ढाले की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने इस बार लोकसभा चुनाव में सामूहिक मतदान के बदले नोटा बटन दबाने का एलान कर दिया था। साथ ही गांव के पुरुषों और महिलाओं ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता और राजनीतिक दलों और नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राजनीतिक दलों के लोगों का गांव में प्रवेश वर्जित का बैनर जगह-जगह टांग दिया गया।

गांव वालों ने 24 मार्च, 27 मार्च, 30 मार्च, दो अप्रैल, 21 अप्रैल और तीन मई को विरोध प्रदर्शन किया। डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर डा. अंकुर लाठर ने गांव में रास्ता बनवाने की आश्वासन दिया। गांव वालों की मांग पर रास्ते के लिए किसानों ने भूमि देने का आश्वासन भी दिया। लेकिन अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की। इस पर 18 मई की सुबह ग्रामीणों ने बैठक कर मतदान बहिष्कार का निर्णय लिया। रविवार को मतदान के बहिष्कार की सूचना पर एसडीएम सदर डा. अंकुर लाठर गांव में पहुंची और गांव वालों को मतदान के लिए राजी करने की कोशिश किया, लेकिन ग्रामीण टस से मस नहीं हुए। एसडीएम के दबाव पर केवल गांव के चौकीदार, आशाओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वोट डाले। प्रधान प्रतिनिधि राजेंद्र मौर्य ने बताया कि तीन महीने से रास्ते की मांगों को लेकर अधिकारियों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन आश्वासन के बाद भी अफसरों ने कुछ नहीं किया।
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