जलस्तर घटने के साथ ही घाघरा की कटान तेजी से किनारों को काट रही है। तटवर्ती इलाके के किसान इससे परेशान हैं। घाघरा की प्रयंकारी लहरे डेढ़ से दो फीट ऊपर उठ रही हैं। मुक्तिधाम तथा खाकी बाबा की कुटी के पास कटान तेज हो गई है। इसके बावजूद शासन प्रशासन की ओर से कटान का स्थाई समाधान नहीं निकाला गया।
नदी के जलस्तर में कमी के बावजूद नदी के कहर बरपाने से कस्बावासी तथा तटवर्ती इलाके के लोग चैन से सो नहीं हो पा रहे। सभी शासन प्रशासन को कोस रहे हैं। नदी में ऊंची लहरें उठते देखकर लोगों को नदी के रौद्र रूप धारण करने की डर सताने लगा है।
कटान की स्थिति यह है कि मुक्तिधाम के पास शवदाह घाट तथा चबूतरा नदी में विलीन हो चुका है। अब मुक्तिधाम पर नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे भारत माता मंदिर पर खतरा बढ़ गया है। मुक्तिधाम के उत्तर खाकी बाबा की कुटी पर कटान तेज हो जाने से नगरवासियों के होश उड़ गए हैं।
कटान पीड़ितों की मानें तो कटान समस्या से निजात दिलाने के लिए 22 करोड़ की लागत से 960 मीटर तक पिचिंग का कार्य धनौली से लेकर मुक्तिधाम तक होना था। लेकिन विभागीय अधिकारियों गैरजिम्मेदाराना रवैए के चलते शवदाह के चबूतरे तक 90 मीटर पिचिंग नहीं हो सका जिसका परिणाम यह हुआ कि शवदाह घाट तथा चबूतरा कट कर घाघरा में समा गया।