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Mau News: ब्रेन स्ट्रोक, माइग्रेन और मस्तिष्क के मरीजों को जिले में नहीं मिलता इलाज

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स्वास्थ्य विभाग के दावों के उलट जनपद आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बहुत पिछड़ा है। जिला अस्पताल में अभी किसी न्यूरोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है।
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इसके चलते ब्रेन स्ट्रोक, मिर्गी, नसों में खिंचाव और माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए हायर सेंटर या फिर दूर जिलों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं दुर्घटना में सिर की चोट से घायल मरीजों को भी उपचार नहीं मिल पाता है। मरीजों को समय और पैसा दोनों ही अधिक खर्च करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अस्पताल की इमरजेंसी में सिर में चोट के लगभग रोज तीन मामले आते हैं।
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जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी इकाई जिला अस्तपाल में भले ही तमाम व्यवस्थाएं की गई हों लेकिन जिले के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अभी भी दूसरे जनपदों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
न्यूरो संबंधी समस्या लेकर आने वाले मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार देकर मरीजों को सीधे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है या फिर किसी बड़े शहर में जाने का सुझाव दिया जाता है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को होती है जिन्हें अचानक ब्रेन स्ट्रोक आता है। स्ट्रोक के दौरान शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन रास्ते के सफर में ही समय बीत जाने से कई बार मरीज की जान पर बन आती है या वह हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाता है।



दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को भी नहीं मिल पाता इलाज



मऊ। जनपद में न्यूरो सर्जन नहीं है। ऐसे में दुर्घटना से सिर में लगी गंभीर चोट के मरीज को इलाज नहीं मिल पाता है। जिला अस्पताल आने पर मरीज को प्राथमिक उपचार दे दिया जाता है और इसके बाद उन्हें वाराणसी या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। समय से इलाज न मिल पाने पर कई बार मरीज की मृत्यु भी हो जाती है।





केस एक

रानीपुर निवासी कमलेश के दिमाग में टेपवर्म की वजह से संक्रमण फैल गया। इससे उन्हें बार-बार झटके आ रहे हैं। जिला अस्पताल में उपचार नहीं होने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। चूंकि, परिजन आर्थिक रूप से कमजोर हैं ऐसे में मरीज को बड़ी मुश्किल से लेकर जा पाए।





केस दो

कोपागंज ब्लाक के चौबेपुर निवासी शेषनाथ शर्मा का एक्सीडेंट गत दिनों को हो गया था। रात दस बजे उसे जिला अस्तपाल में भर्ती कराया गया। सिर में काफी चोट आई थी। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया लेकिन जब स्थिति बिगड़ने लगी तो उसे दूसरे दिन हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।



केस तीन



गाजीपुर जनपद के बिरनो थाना क्षेत्र के नसीरपुर डाडी निवासी विपुल यादव (21) को सिर में चोट लगने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। न्यूरो का चिकित्सक नहीं होने से उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
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जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं प्राथमिक उपचार के बाद ऐसे मरीजों को वाराणसी या लखनऊ सहित अन्य हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है।



- डॉ. धनंजय कुमार सीएमएस जिला अस्पताल
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