जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं से लेकर अन्य चिकित्सा सुविधाओं का घोर अभाव है। अस्पतालों पर तैनात डाक्टर नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं आते। डाक्टरों अस्पताल पर आने के लिए एक अथवा दो दिन नियत कर रखे हैं। उस दिन अस्पताल पर आकर ओपीडी रजिस्टर में मरीजों के फर्जी नाम लिखकर खानापूरी करते हैं। दवाआें के नाम पर पैरासिटामाल , कैल्शियम और बी कम्लेक्स को टेबलेट मरीजों को थमा दी जाती है। चिकित्सा सुविधाओं के नाम पर कहीं एक्स-रे नहीं होता तो कहीं अल्ट्रासाउंड मशीन है तो विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं है।
जिले में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 36 नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सीएचसी पर फिजीशियन, जनरल सर्जन, ईएनटी सर्जन, आर्थो सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, लेडी डाक्टर, एनेस्थीसिया सहित आठ चिकित्सकों की तैनाती का शासनादेश है। लेकिन एक भी सीएचसी पर लेडी डॉक्टर नहीं आतीं। पीएचसी पर लेडी डाक्टर का पद नहीं होता पर दोहरीघाट पीएचसी पर एक महिला चिकित्सक की स्थाई की तैनाती तथा रानीपुर पीएचसी पर एक संविदा लेडी डाक्टर की पोस्टिंग है। लेकिन हाल यह है कि एक भी सीएचसी पर कभी कोई लेडी डाक्टर नहीं आती। रानीपुर में तो लेडी डॉक्टर के न आने पर मुकामी लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है। घोसी और मुहम्मदाबाद गोहना सीएचसी को छोड़ कर जिले की किसी भी सीएचसी पर एक्सरे नहीं होता। अल्ट्रासाउंड तो किसी भी सीएचसी पर नहीं नहीं होता। घोसी को छोड़ दिया जाय तो कहीं पर आपरेशन नहीं होता। मरीजों को जिला अस्पताल आना पड़ता है अथवा किसी नर्सिंग होम अथवा झोलाछाप डाक्टर की शरण लेनी पड़ती है। नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत तो और भी खराब है। चूंकि इन अस्पतालों पर डॉक्टर आते ही नहीं तो मरीज भी उधर का रुख नहीं करते। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित न्यू पीएचसी पर तैनाती कराकर डाक्टर कसबों अथवा जिला मुख्यालय पर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। सीएमओ की ओर से इन अस्पतालों का कभी निरीक्षण करके डाक्टरों के नियमित रूप से सही समय पर अस्पताल आने के लिए कड़ाई नहीं की जाती। एंटी रैबीज तो कभी किसी सीएचसी, पीएचसी पर मिलता ही नहीं।