बढुआ गोदाम। केंद्र सरकार की तरफ से अनलाक -5 के तहत 15 अक्तूबर से स्कूल कालेज खोलने को लेकर गाइडलाइन जारी किया गया है। सरकार के इस फरमान से अभिभावकों में कोरोना से बचाव के उपाय को लेकर संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। इस मामले में अभिभावकों से बातचीत की गई तो सभी ने विद्यालयों में कोरोना से बचाव के उपाय का आकलन कर ही बच्चों को विद्यालय भेजने की बात कही। नगर क्षेत्र के बकवल गांव निवासी रवि प्रकाश सिंह उर्फ छेदी सिंह का कहना था कि जब पूरे देश में कोरोना मरीज कम थे तो सरकार ने पूरे देश में लाकडाउन लगा दिया। ऐसे मे जब देश में प्रतिदिन 70 हजार से अधिक कोरोना मरीज रोज निकल रहे हैं तो बच्चों को स्कूल भेजने में हिचक हो रही है। प्रशासन की तरफ से स्कूलों, कालेजों में कोरोना से बचाव के उपाय कराए जाएं। साथ ही मानीटरिंग सेल का गठन किया जाए। बेहतर व्यवस्था कराया जाए। नगर क्षेत्र के डारेपार निवासी राम आशीष का कहना था कि जब तक इस बीमारी की कोई दवा नहीं आ जाती तब तक बच्चों को स्कूल भेजना मतलब खतरा मोल लेना है । एक कक्षा में 70-80 बच्चे पढ़ते हैं और एक टीचर पर सभी बच्चों की जिम्मेदारी होती है, ऐसे में वह बच्चों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे कर पाएंगे। स्कूल में कोरोना से बचाव के उपाय को देखकर ही बच्चों को स्कूल भेजने पर विचार करेंगे।
ताजोपुर गांव निवासी अनिल दुबे का कहना था कि स्कूल में हजारों परिवार के बच्चे पढ़ने के लिए आएगें। सरकार और स्कूल प्रसाशन किस तरह से बच्चों को इस बीमारी से बचाव के उपाय करेगा। जब तक हम स्कूल में कोरोना से बचाव के उपाय सेपूरी तरह से संतुष्ट हो जाने पर ही बच्चों को स्कूल भेजेंगे। नगर क्षेत्र के शैलेंद्र सिंह का कहना था कि कोरोना को देखते हुए बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं हैं। प्रशासन की तरफ से स्कूलों, कालेजों में कोरोना से बचाव के उपाय की गारंटी मिलने पर ही बच्चों को स्कूल भेजेंगे।