स्मार्ट मीटर के झटके से अभी उपभोक्ता किसी तरह उबरे ही थे कि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के गृह जिले में एक बार फिर बिजली निगम ने 71 हजार उपभोक्ताओं को झटका दे दिया। यह झटका उनके बिजली कनेक्शन की क्षमता में वृद्धि का है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि इसकी सूचना तक निगम ने नहीं दी और अब बिजली बिल के साथ लोड भी बढ़ गया। इतना ही नहीं, एक किलोवाट की श्रेणी में आने वाले हजारों उपभोक्ताओं को मिल रही सरकारी सब्सिडी भी एक झटके में ही स्वतः समाप्त हो गई है।
उधर विभागीय अधिकारी का तर्क है कि यदि किसी उपभोक्ता का लोड लगातार तीन महीने स्वीकृत क्षमता से अधिक दर्ज होता है, तो सिस्टम स्वतः उसे अपग्रेड करता है। इसी के चलते 71 हजार उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ गया है।
बताते चलें कि जिले में तीन डिवीजन प्रथम, द्वितीय और तृतीय खंड में विभाजित हैं। इनमें साढ़े चार लाख 40 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। बिजली निगम के अनुसार, नया सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू किया गया है।
इसके तहत यदि कोई उपभोक्ता गर्मी के दिनों में या किसी कारणवश लगातार तीन महीने अपने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का उपभोग करता है, तो सिस्टम उसे स्वतः चिह्नित कर लेता है। ऐसे में चार से पांच माह के भीतर 71 हजार उपभोक्ताओं को इस सिस्टम ने चिह्नित किया और उनके बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाया गया है।
वहीं, उपभोक्ता बृजलाल खरवार, राजकुमार और अनिल कुमार आदि ने बताया कि निगम के जिम्मेदार नियमों को ताक पर रखकर बिना उपभोक्ताओं को सूचित किए सीधे सिस्टम में उनके कनेक्शन की क्षमता को अपग्रेड कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं के अनुसार, जिनका लोड दो किलोवाट था, उसे तीन किलोवाट और तीन किलोवाट को चार किलोवाट में बदल दिया गया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कनेक्शन क्षमता वृद्धि का असर बिजली के बिलों में फिक्स चार्ज पर पड़ा है।
वर्तमान में विद्युत नियामक आयोग के नियमों के अनुसार प्रति किलोवाट के हिसाब से फिक्स चार्ज वसूला जाता है। लोड बढ़ते ही उपभोक्ताओं के बिल में प्रति किलोवाट 110 से 440 रुपये तक अतिरिक्त फिक्स चार्ज जुड़कर आ रहा है।
बिना सूचना के बढ़ाया लोड, छिन गई सब्सिडी
बिजली निगम ने जिले के मध्यम वर्ग और गरीब तबके को भी इस आर्थिक मुसीबत में शामिल कर लिया है। सरकार की नीति के अनुसार एक किलोवाट के घरेलू कनेक्शन धारकों और कम बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को बिजली दरों में विशेष सब्सिडी का लाभ मिलता है। जैसे ही विभाग ने बिना बताए इन उपभोक्ताओं का लोड एक किलोवाट से बढ़ाकर दो किलोवाट किया है, सरकारी सिस्टम ने उन्हें सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया है। अब इन उपभोक्ताओं को न केवल 110 रुपये महीने का बढ़ा हुआ फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है, बल्कि प्रति यूनिट महंगी दर से बिजली का भुगतान भी करना पड़ रहा है।
प्रतिक्रिया-
बिजली उपभोक्ता अधिकार नियम के तहत किसी भी उपभोक्ता के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस जारी करना होता है। जिले में बिजली विभाग इन नियमों का उल्लंघन करते हुए सीधे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल रहा है। -बृजलाल खरवार, बहरीपुर
उपभोक्ताओं का बिजली निगम से सवाल है कि बिना लिखित नोटिस या मोबाइल पर एसएमएस भेजे लोड कैसे बढ़ाया जा रहा है। लोड बढ़ाने से पहले उपभोक्ताओं के परिसरों का भौतिक सत्यापन नहीं किया जा रहा है। -सुनिता मिश्रा, फरसरा खुर्द
पुराना लोडनया लोड फिक्स चार्ज में मासिक बढ़ोतरी (अनुमानित)
1 किलोवाट2 किलोवाट110 अतिरिक्त
2 किलोवाट3-4 किलोवाट330 से 440 अतिरिक्त
3 किलोवाट4-5 किलोवाट440 से 550 अतिरिक्त
कोट-
किसी उपभोक्ता का लोड लगातार तीन महीने स्वीकृत क्षमता से अधिक दर्ज होता है, तो सिस्टम स्वतः उसे अपग्रेड करता है। इसके बाद एसडीओ के माध्यम से क्षमता वृद्धि को स्थायी किया जाता है। यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि यह गलत हुआ है, तो वह लिखित शिकायत दे सकता है। जांच कराई जाएगी।
-मागेंद्र कुमार, अधीक्षण अभियंता, मऊ।