फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डाक्टर के चेंबर में बैठकर बाहरी व्यक्ति लिख रहा दवाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। जिला अस्पताल प्रशासन सहित चिकित्सकों की मनमानी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। चिकित्सकों की लेट लतीफी और अस्पताल से नदारद रहना रोज का शगल बन गया है। लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदारों की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं रही सही कसर जिला अस्पताल में इंटर्नशिप करने वाले निकाल रहे हैं। स्थिति यह है कि डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में प्राइवेट व्यक्ति मरीजों का इलाज करते दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में की पड़ताल में बुधवार को स्थिति काफी दयनीय दिखाई दी। पूर्वाह्न 11.40 बजे अस्पताल की ओपीडी में कमरा नंबर तीन से डॉ. संदीप कुमार गुप्ता नदारद रहे। उनके चेंबर में बैठा एक निजी व्यक्ति ही मरीजों को परामर्श देता दिखा। इसके साथ ही मरीजों को अस्पताल के अंदर तथा बाहर की दवाएं भी लिख दी। दोपहर तक वह 16-17 मरीजों को परामर्श दे चुका था। पूछने पर बताया कि वह वहां इंटर्नशिप कर रहा है। यह कोई पहली बार नहीं है, जब कोई प्राइवेट व्यक्ति चिकित्सक के चेेंबर में बैठकर मरीजों का इलाज कर रहा हो। जिला अस्पताल में यह सब अस्पताल प्रबंधन की आंख के सामने हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं गत दिनों प्रभारी सीएमएस रहे दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी आर्या भी अपने चेंबर से नदारद रहे। ओपीडी से चिकित्सकों के नदारद रहने के कारण मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में 10 चिकित्सकों की कमी
मऊ। जिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी के बीच संचालित हो रहा है। जिला अस्पताल में 26 चिकित्सकों का पद है। इसके सापेक्ष 16 चिकित्सकों की तैनाती है। दो फिजीशियन की तैनाती है, जबकि एक पद काफी समय से खाली है। वहीं हृदय रोग विशेषज्ञ का पद काफी समय से खाली है। ईएनटी चिकित्सक का पद रिक्त है। नेत्र रोग विशेषज्ञ के दो पदों के सापेक्ष एक चिकित्सक की ही तैनाती है। दंत रोग चिकित्सक के नाम पर एक चिकित्सक तैनात हैं। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट के दो पदों के सापेक्ष एक रेडियोलाजिस्ट की तैनाती हैं। वह भी पिछले एक माह से छुट्टी पर चल रहे हैं।
विज्ञापन

इमरजेंसी मेडिकल आफिसर की नहीं हो पा रही तैनाती
मऊ। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिए इमरजेंसी मेडिकल आफिसर का तीन पद काफी समय से रिक्त चल रहा है। मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। जिससे ओपीडी में इलाज काफी प्रभावित होता है। अस्पताल में ईएमओ की तैनाती के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने की बात कही जाती है। लेकिन इसके बाद भी ईएमओ की तैनाती नहीं हो पा रही है।
एनसीडी क्लीनिक को चिकित्सक का इंतजार
मऊ। जिले में गैर संचारी रोग डायबिटीज, रक्तचाप, कैंसर, मानसिक बीमारी, किडनीरोग, आर्थराइटिस आदि बीमारियों के इलाज के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में एनसीडी (नान कम्युनिकेबल डिसीज) क्लीनिक बनाया गया। जहां वर्ष 2018 तक फिजीशियन चिकित्सक की तैनात रही। जबकि पिछले तीन वर्षों से क्लीनिक चिकित्सक का इंतजार कर रहा है। बेहत इलाज के लिए सरकार की तरफ से अलग से एनसीडी क्लीनिक की व्यवस्था की गई है।
जिला अस्पताल के सीएमएस बृज कुमार ने बताया कि अस्पताल में इंटर्नशिप करने वाले विद्यार्थी डाक्टर्स के चेंबर में भी रहते हैं। ओपीडी के क्रिया कलापों की जांच की जाएगी। लापरवाही तथा अवैध रूप से अस्पताल में घूमने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही बाहर की दवाएं लिखे जाने की भी जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें