वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में 53 दिन शेष है, लेकिन अभी तक केवल 10 फीसदी यानी 645 में से 64 ग्राम पंचायतें ही खर्च का लेखा जोखा विभाग को दे पाई हैं।
अगले वित्तीय वर्ष में पंचायत चुनाव के चलते बजट आने में देरी होगी। एक सप्ताह पहले सीडीओ ने 9 एडीओ पंचायतों और डीपीआरओ को नोटिस जारी किया था। समय से ऑडिट पूरा नहीं होना भी बजट में बाधक बनेगा और गांवों का विकास भी बाधित होगा।
ग्राम विकास अधिकारियों को ही विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने होते हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी की ड्यूटी एसआईआर में लगे होने से ऑडिट में समस्या आ रही है। 15वां वित्त आयोग से हर साल जिले की 645 ग्राम पंचायतों के लिए 52 करोड़ रुपये धनराशि चार किश्तों में आती है।
दो किश्त टाइड फंड और दो किश्त अनटाइड फंड में। अक्तूबर माह में दो किश्त 26.56 करोड़ रुपये मिल गई थी। अनटाइड फंड होती है ग्राम प्रधान स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार, बिना किसी विशेष शर्त के, विकास कार्यों में खर्च कर सकते हैं।
दूसरा टाइड फंड है जो एक सशर्त अनुदान है। ये फंड प्रधान को केवल विशिष्ट कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका 50% हिस्सा पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और पुनर्चक्रण, जबकि 50% हिस्सा स्वच्छता और ओडीएफ स्थिति के रखरखाव के लिए अनिवार्य रूप से खर्च करना होता है।
पांचवें वित्त आयोग से राज्य सरकार सभी ग्राम पंचायतों को हर साल 54 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। इस अनुदान से हर माह 645 ग्राम पंचायतों के लिए 4.33 करोड़ रुपये भेजी जाती है, जिसे प्रधान अपने अनुसार खर्च करते हैं। इस साल दिसंबर माह तक इस अनुदान के तहत 39 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जनवरी माह में धनराशि नहीं भेजी गई।