प्रादेशिक चिकित्सा सेवा संघ प्रशासनिक
अधिकारियों के नियंत्रण में नहीं रहना चाहता है। मुख्यमंत्री को भेजे गए
ज्ञापन में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों का आरोप है कि
प्रशासनिक अधिकारियों की स्वेछाचारिता से डाक्टरों के साथ आपराधिक घटनाएं,
हिंसा और उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं।
उनका तर्क है कि चिकित्सा सेवाओं
को सुचारु बनाने के लिए चिकित्सकों के साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों
की भी बड़ी जिम्मेदारी है।चूंकि सेवा में चूक, भ्रष्ट आचरण , अनियमितता,
तथा आपराधिक कृत्य से निपटने के लिए भिन्न भिन्न प्रावधान है।
इसलिए
प्रशासनिक अधिकारियों को इन प्रावधानों का समुचित ज्ञान होना आवश्यक है
जिससे वे पूर्वाग्रह से मुक्त होकर जन शिकायतों का निस्तारण कर सकें।
इन
चिकित्सकों का तर्क है कि चिकित्सा संवर्ग के किसी चिकित्सक द्वारा हुई
चूक, अनियमितता, भ्रष्ट आचरण , या अपराधिक कृत्य की शिकायतों के निस्तारण
के लिए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया व शीर्ष न्यायालय के निर्देशों के आलोक
में कई प्रावधान हैं।
इसके साथ ही प्रदेश सरकार के शासनादेशों में भी कई
सुसंगत प्रावधान हैं । बेहतर होगा कि इन प्रावधानों का सुसंगत अनुपालन किया
जाए। जिससे प्रशासनिक अधिकारियों की स्वेच्छाचारिता और अहंकार का कोई
स्थान न हो ।
संघ के जनपदीय इकाई की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित इस आशय
का ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने वालों में डा. एके
रंजन , डा. देवेंद्र नाथ राय , डा. सरोजी बी प्रसाद ,डा. विभा कुमारी ,
डा. एपी गुप्ता, डा. आर आर चौहान, डा. आर एम मिश्रा , डा. चंद्रशेखर साहनी
आदि मौजूद रहे।