मऊ। सरकारी दफ्तरों में समय से पहुंचने के दायित्वों का निर्वहन खुद अधिकारी ही नहीं कर रहे हैं। जब विभागाध्यक्ष ही समय से अपने कार्यालय नहीं पहुुंचते हैं तो अधीनस्थ कर्मचारी भी समय से दफ़्तर पहुंचने में देरी कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य शुक्रवार को जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में दिखा। इस दोनों अधिकारियों की कुर्सियां खाली रहीं। वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक और लेखाधिकारी राष्ट्रीय शिक्षा अभियान के कक्ष पर ताला लगा रहा।
अमर उजाला की टीम ठीक दस बजे जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पहुंची। उस समय वरिष्ठ लिपिक अरविंद मिश्र कोने में स्थित अपनी टेबल पर बैठे कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहे थे। इधर राजेश कन्नौजिया कार्यालय समय से आ तो गए थे लेकिन कमरे से बाहर परिसर में ही देरी तक मोबाइल पर बात करने के बाद 10.10 बजे वे अंदर आए और पहले से काम कर रहे दो अन्य सहकर्मियों के बगल में बैठे। 10.15 बजे जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद अपने कक्ष में पहुुंचे। 10.20 बजे लेखा अनुभाग में ताला बंद रहा।
ऊपरी मंजिल पर माध्यमिक शिक्षा अभियान के लेखाधिकारी मनोज तिवारी की कुर्सी खाली रही। यहीं पर बगल के एक कक्ष में कंप्यूटर पर संजीव श्रीवास्तव काम करते दिखे। जबकि लेखाकार की कुर्सी खाली दिखी। वित्त एवं लेखाधिकारी मु. करीम के कक्ष में ताला बंद रहा। 10.15 बजे जिलाधिवद्याल निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद अपने कक्ष में पहुंचे।10.20 बजे लेखा अनुभाग में ताला बंद रहा। उधर 10.30 बजे बीएसए की कुर्सी खाली रही, जबकि 10.35 बजे अपनेेे सर्वशिक्षा अभियान के संविदा कर्मचारी अपनी केबिन में काम करते दिखे।
10.37 बजे लेखाधिकारी सर्वशिक्षा अभियान की कुर्सी खाली रही। जबकि 10.45 बजे लेखाधिकारी बेसिक अपने कक्ष में काम करते दिखे। डीआईओएस ने आते ही बताया कि उनके पिताजी की तबीयत खराब हो गई है, अभी अभी फोन आया है वे राजेश कन्नौजिया से कोई मैटर टाइप कराने लगे।
डीआईओएस राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि विभागीय कार्यों को निपटाने में ही दफ्तर पहुंचे में मामूली देरी हो गई है। दफ्तर के कुछ कर्मचारीविभागीय कार्य से बाहर गए हैं।
फाइल रखने को रैक नहीं है
मऊ। बीएसए कार्यालय में कार्यरत स्थाई कर्मचारियों के बैठने वाला कमरा काफी जीर्णशीर्ण हाल में पहुंच गया है। इस हाल में लगे जंगलों की छड़ें लगने से कमजोर हो गईं। तनिक दबाव पर टूट जाती हैं। इस हाल की पीछ़े की खिडकियां टूट गई हैं , शीशे नहीं हैं।जिससे गर्मी के दिनों में लू के थपेड़े आते हैं। सर्दी के दिनों में सर्द हवा का सामना करने को विवश रहते हैं ये कर्मचारी। यहां फाइलों को रखने के लिए रैक नहीं हैं। इससे अभिलेख आलमारियों के ऊपर कपड़ों गट्ठर में बांध कर रखे गए हैं। आपस में चंदा एकत्र करके इन कर्मचारियों ने खिड़कियों पर परदे लगवाएं हैं। पंखे खराब हैं। टूटी खिड़कियों से बिल्लियां अथवा अन्य जंगली जीव जंतु कमरे के अंदर आकर गंदगी करते हैं। कर्मचारियों की शिकायत है कि हम लोग स्थाई कर्मचारी हैं ,इसलिए जीर्णशीर्ण कमरे में रहने को विवश हैं जबकि इसके विपरीत संविदा पर कार्य करने वाले कर्मी एसी कमरों में काम करते हैं।