मऊ। सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों कर्मचारियों के समय से पहुंचने में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। कर्मचारी पहुंच भी जा रहे हैं तो अधिकारी ही देरी से पहुंच रहे हैं। अधिकारियों कर्मचारियों के देरी से दफ्तर पहुंचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। मंगलवार को जलनिगम के अधिशासी अभियंता कार्यालय में भी एक दो कर्मचारी को छोड़कर शेष सभी कर्मचारी अधिकारी बीस मिनट बाद ही दफ्तर आए।
अमर उजाला की टीम ठीक 10 बजे जल निगम के अधिशासी अभियंता कार्यालय पहुंच गई। उस समय दफ्तर के बाहर सफाई कर्मी झाड़ू लगा रहा था। 10.05 बजे अधिशासी अभियंता के स्टेनो अपनी कुर्सी पर आ चुके थे। 10.20 बजे सहायक अभियंता हर्षनाथ राम अपने कक्ष में पहुंचे। उनके एक सहकर्मी सहायक अभियंता 10.25 बजे आफिस आए लेकिन वे दूसरे कर्मचारियों से बातचीत में मशगूल हो गए। लेखा विभाग के एक अन्य कर्मचारी भी अपनी सीट पर 10.10 बजे आ गए थे।
विभाग में कार्यरत अन्य चार कर्मचारी भी अपने अपने कक्षों में अपनी सीटों पर आ गए थे लेकिन कई कर्मचारियों की कुर्सियां 10.27 बजे तक खाली रहीं। कंप्यूटर आपरेटर भी 10.28 बजे तक अपनी सीट पर आ गए थे। हालांकि उनका कहना था कि वे कुछ काम से अपने सहकर्मी के कमरे में चले गए थे। 10.30 बजे अधिशासी अभियंता भी दफ्तर आ गए। वे अमृत योजना के तहत शहर के भदेसरा में निर्माणाधीन प्लांट का निरीक्षण करने चले गए थे। उन्होंने दफुतर पहुंचते ही निर्धारित समय से देरी से आने के बाबत मातहतों को फटकार भी लगाई ,कहा कि दफ्तर हर हाल में समय से पहुंचें और अपना काम शुरु कर दें। जल निगम का यह आफिस पिछले दस सालों से टीनशेड में चल रहा है। पहले यह विभाग का गोदाम हुआ करता था और ऑफिस किराए के कमरे में चलता था लेकिन किराए के भवन से हटाकर इस आश्वासन के साथ इसे यहां शिफ्ट कर दिया गया कि बाद में बजट की व्यवस्था होने पर इसी परिसर में नया भवन बनवा दिया जाएगा।
झाड़ियों में तब्दील परिसर
मऊ। पूरे परिसर का दृश्य वन जैसा दिख रहा था। चारों तरफ हरियाली थी। पेड़ पौधों से आच्छादित ऊंचे ऊंचे कदम के पेड़ और कुछ छोटे पेड तथा बड़ी बड़ी घास परिसर में उगी हुई थी। चारों तरफ पाइप और वाटर सप्लाई वाले पाइप और उन्य सामान तथा उपकरण जहां तहां बिखरे हुए थे। पीछे की ओर विभाग की एक पुरानी निष्क्रिय हो चुकी जीप और एक ट्रैक्टर पडा था। परिसर के मुुख्य गेट के दाहिनी तरफ रसोई बनाने के लिए एक चूल्हा बना था जां इंगित कर रहा था कि यहां लकडियों से रसोई बनाई गई है।
जर्जर भवन में चल रही प्रयोगशाला
मऊ। परिसर में जिस टीन शेड में विभाग की कार्यशाला संचालित हो रही है। कुछ समय पहले ही हुई बरसात से उसकी छत टपक रही थी। इसमें कार्या करने वाली कर्मचारी 10.50 बजे तक नहीं आई थी। एक व्यक्ति पानी की जांच कराने के लिए सैंपल लेकर देरी से इंतजार कर रहा था। विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी ने सहृदयता दिखाते हुए सैंपल ले लिया और दो दिन बाद रिपोर्ट के लिए आने को कहा।
चार महीने से नहीं मिल रहा वेतन
मऊ। यहां कर्मचारियों को पिछले चार माह से वेतन नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ा रहा है। इन कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना संकट में लोगों को अतिरिक्त सहायता देने वाली सरकार विभाग के कर्मचारियों को समय से वेतन भी नहीं दे रही है।
अधिशासी अभियंता एमए किदवई ने बताया कि अमृत योजना के तहत बन रहे एक प्लांट का निरीक्षण करने चला गया था। वहां से लौटने में कुछ दूरी हुई। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वे समय से दफ्तर पहुंचें। देरी से आने वाले अधिकारियों कर्मचारियों से देरी के बाबत जवाब तलब किया जाएगा।